झारखंड स्थापना दिवस पर मिल सकती है बड़ी सौगात, रांची में तैयार हो रहा राज्य का पहला कृषि संग्रहालय

रांची के कांके रोड स्थित कृषि भवन परिसर में झारखंड का पहला कृषि संग्रहालय तैयार किया जा रहा है। यहां जैविक खेती, पॉलीहाउस, ड्रिप इरिगेशन, सीढ़ीदार खेती और कृषि इतिहास से जुड़े मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इसे 15 नवंबर से पहले तैयार करने का लक्ष्य है।

Oct 29, 2026 - 13:22
झारखंड स्थापना दिवस पर मिल सकती है बड़ी सौगात, रांची में तैयार हो रहा राज्य का पहला कृषि संग्रहालय

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में कृषि क्षेत्र से जुड़ी एक खास पहल की जा रही है। कांके रोड स्थित कृषि भवन परिसर में राज्य का पहला कृषि संग्रहालय तैयार किया जा रहा है। इस संग्रहालय में लोगों को पारंपरिक खेती से लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों तक की जानकारी मिलेगी। कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और किसानों के लिए भी यह संग्रहालय उपयोगी साबित हो सकता है।

कृषि निदेशालय परिसर स्थित लक्ष्मी निवास कोठी में बन रहे इस संग्रहालय में खेती के विभिन्न तरीकों, सिंचाई की आधुनिक तकनीकों, जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया और कृषि के इतिहास को प्रदर्शित करने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार, संग्रहालय को 15 नवंबर से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। झारखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर इसके उद्घाटन की उम्मीद जताई जा रही है।

पारंपरिक खेती से आधुनिक तकनीक तक की मिलेगी जानकारी

कृषि संग्रहालय में खेती के बदलते स्वरूप को अलग-अलग मॉडल के माध्यम से दिखाया जाएगा। इसमें ऑर्गेनिक फार्मिंग यानी जैविक खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग यानी एकीकृत कृषि प्रणाली, जैविक खाद बनाने की तकनीक, पॉलीहाउस खेती और ड्रिप इरिगेशन जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

इन मॉडलों के जरिए किसानों और विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर खेती को किस तरह अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। वहीं, शोधकर्ताओं के लिए भी कृषि पद्धतियों और तकनीकी बदलावों को समझने का अवसर मिलेगा।

वेस्टेज धातु से बनाई जा रही अन्नदाता की प्रतिमा

संग्रहालय में प्रवेश करते ही आगंतुकों को वेस्टेज धातु से तैयार की जा रही अन्नदाता की प्रतिमा दिखाई देगी। इस प्रतिमा में गेहूं की बाली और कृषि औजारों के साथ किसान का प्रारूप तैयार किया जा रहा है।

कृषि निदेशालय के निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज के अनुसार, प्रतिमा के जरिए किसानों के योगदान और कृषि के महत्व को दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है। संग्रहालय की साज-सज्जा और प्रदर्शित मॉडल को इस तरह तैयार किया जा रहा है, जिससे यहां आने वाले लोगों को खेती से जुड़ी जानकारी सरल तरीके से मिल सके।

झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार तैयार होंगे मॉडल

झारखंड की भौगोलिक बनावट को ध्यान में रखते हुए संग्रहालय में पठारी क्षेत्रों में खेती के मॉडल भी तैयार किए जा रहे हैं। इसमें सीढ़ीदार खेतों के जरिए खेती करने की पद्धति को प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अलावा खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर किसानों की आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं को भी मॉडल के माध्यम से समझाया जाएगा। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों की कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जा रहे ये मॉडल किसानों को वैकल्पिक कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी देने में सहायक हो सकते हैं।

पॉलीहाउस में खेती के मॉडल भी संग्रहालय का हिस्सा होंगे। इनके माध्यम से नियंत्रित वातावरण में फसलों की खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी।

कृषि इतिहास और आधुनिक तकनीकों का बनेगा केंद्र

इस संग्रहालय में प्राचीन कृषि पद्धतियों से लेकर वर्तमान समय में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों तक को प्रदर्शित करने की योजना है। इससे आगंतुकों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि समय के साथ खेती के औजारों, सिंचाई के तरीकों और उत्पादन तकनीकों में किस तरह बदलाव आया है।

कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह संग्रहालय व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का माध्यम बन सकता है। वहीं, किसानों को नई तकनीकों और खेती के विभिन्न विकल्पों से परिचित कराने में भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

15 नवंबर से पहले निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

कृषि निदेशालय के निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बताया कि संग्रहालय को 15 नवंबर से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर इसके उद्घाटन की उम्मीद भी जताई जा रही है।

यदि निर्धारित समय के अनुसार काम पूरा होता है, तो स्थापना दिवस के आसपास राज्य को पहला कृषि संग्रहालय मिल सकता है। हालांकि, उद्घाटन की अंतिम तारीख और आम लोगों के लिए प्रवेश की व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

कुल मिलाकर, रांची में तैयार हो रहा यह कृषि संग्रहालय झारखंड की पारंपरिक कृषि विरासत और आधुनिक तकनीकों को एक ही स्थान पर प्रदर्शित करने की पहल है। इसके शुरू होने के बाद किसानों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आम लोगों को खेती के इतिहास, नई तकनीकों और कृषि आधारित आजीविका की संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर मिल सकता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0