झारखंड में टैक्स चोरी पर लगेगी लगाम! 6 महीने में तैयार होगा AI आधारित IRIS सिस्टम, कई विभागों का डेटा होगा एकीकृत
रांची: झारखंड में राजस्व संग्रहण बढ़ाने और कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए राज्य सरकार ने तकनीक आधारित पहल की है। वाणिज्य-कर विभाग की CT-MIS परियोजना के तहत नए सिस्टम इंटीग्रेटर Choice Consultancy Services Private Limited के साथ एकरारनामा किया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत Integrated Revenue Intelligence System (IRIS) विकसित किया जाएगा। यह प्रणाली विभिन्न सरकारी विभागों के ऑनलाइन पोर्टल और डेटाबेस को एकीकृत कर राजस्व से जुड़ी जानकारियों का विश्लेषण करेगी। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिजनेस इंटेलिजेंस (BI) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
रांची: झारखंड में राजस्व संग्रहण बढ़ाने और कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए राज्य सरकार ने तकनीक आधारित पहल की है। वाणिज्य-कर विभाग की CT-MIS परियोजना के तहत नए सिस्टम इंटीग्रेटर Choice Consultancy Services Private Limited के साथ एकरारनामा किया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत Integrated Revenue Intelligence System (IRIS) विकसित किया जाएगा। यह प्रणाली विभिन्न सरकारी विभागों के ऑनलाइन पोर्टल और डेटाबेस को एकीकृत कर राजस्व से जुड़ी जानकारियों का विश्लेषण करेगी। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिजनेस इंटेलिजेंस (BI) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
29 अक्टूबर 2026 को रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में आयोजित कार्यक्रम में वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में यह एकरारनामा संपन्न हुआ। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से संभावित कर अपवंचन की पहचान करने, राजस्व के नुकसान को कम करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच के अनुरूप राजस्व बढ़ाने की पहल
वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से राजस्व संग्रहण बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य की राजस्व सृजन क्षमता को मजबूत करने और सरकारी आय बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री के अनुसार, जीएसटी सुधारों, मनरेगा के अंतर्गत अनुदान में कमी और MMDR एक्ट से जुड़े मुद्दों के कारण झारखंड को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में राज्य के अपने संसाधनों से राजस्व बढ़ाना महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने IRIS परियोजना को राज्य के राजस्व तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे राजस्व प्रशासन को तकनीक आधारित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
केंद्र की नीतियों से झारखंड को 22 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया कि केंद्र की आर्थिक नीतियों के कारण झारखंड को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य को MMDR एक्ट के कारण लगभग 14 हजार करोड़ रुपये और जीएसटी सुधारों तथा मनरेगा के अंतर्गत अनुदान में कमी के कारण लगभग चार-चार हजार करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
मंत्री ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन खनन गतिविधियों के कारण प्रदूषण, वन क्षेत्र और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, खनिजों के परिवहन से सड़कों को भी नुकसान पहुंचता है। इन प्रभावों से निपटने और विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार को अपने संसाधनों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
हालांकि, 22 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति से संबंधित ये आंकड़े वित्त मंत्री की ओर से दिए गए दावे हैं।
छह महीने में विकसित होगी IRIS प्रणाली
वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव अमित कुमार ने परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि IRIS प्रणाली को छह महीने के भीतर विकसित किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन वर्षों तक परियोजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।
इस प्रणाली के माध्यम से राजस्व संग्रहण से जुड़े विभिन्न विभागों के ऑनलाइन पोर्टल और डेटाबेस को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे अलग-अलग विभागों में उपलब्ध सूचनाओं का एकीकृत विश्लेषण संभव हो सकेगा।
AI और BI आधारित टूल्स की मदद से संभावित कर चोरी, कर अपवंचन और राजस्व ह्रास से जुड़े मामलों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। इसके बाद संबंधित विभाग उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल राजस्व से जुड़ी जानकारियों को एक जगह उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि विभागों को समय पर जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराकर निगरानी व्यवस्था को भी बेहतर बनाना है।
इन सरकारी विभागों के पोर्टल आपस में जुड़ेंगे
IRIS परियोजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों के ऑनलाइन पोर्टल को API इंटीग्रेशन के माध्यम से जोड़ने की योजना है। इससे विभागों के बीच डेटा का आदान-प्रदान और विश्लेषण आसान होगा।
प्रस्तावित एकीकरण में प्रमुख रूप से निम्नलिखित पोर्टल शामिल हैं:
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GSTN और खान एवं भूतत्व विभाग: GSTN API को खान विभाग के JIMMS पोर्टल से जोड़ने की योजना है।
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परिवहन विभाग: VAHAN पोर्टल को राजस्व संबंधी विश्लेषण के लिए एकीकृत किया जाएगा।
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कार्य एवं आईटी विभाग: WAMIS पोर्टल को परियोजना के तहत शामिल किया जाना प्रस्तावित है।
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राजस्व विभाग: भूमि पंजीकरण से संबंधित पोर्टल को एकीकृत किया जाएगा।
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नगर विकास विभाग: प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल को जोड़ा जाएगा।
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श्रम विभाग: लेबर सेस से संबंधित पोर्टल को एकीकृत किया जाएगा।
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उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग: VAT पोर्टल के साथ संबंधित राजस्व पोर्टल का एकीकरण प्रस्तावित है।
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नगर विकास विभाग: JPT पोर्टल और ट्रेड लाइसेंस पोर्टल को जोड़ा जाएगा।
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ऊर्जा विभाग: JED पोर्टल और बिजली बिल पोर्टल के बीच एकीकरण प्रस्तावित है।
इन पोर्टलों से प्राप्त सूचनाओं के विश्लेषण से विभिन्न विभागों के राजस्व संबंधी रिकॉर्ड का मिलान करने और संभावित विसंगतियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
कैसे काम करेगी AI आधारित राजस्व निगरानी प्रणाली?
IRIS प्रणाली का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सरकारी विभागों में उपलब्ध राजस्व संबंधी आंकड़ों को एकीकृत करके उनका विश्लेषण करना है।
उदाहरण के लिए, खनन, परिवहन, भूमि पंजीकरण, संपत्ति कर और अन्य विभागों से मिलने वाली सूचनाओं का आपस में मिलान किया जा सकेगा। डेटा में किसी तरह की संभावित विसंगति सामने आने पर संबंधित विभाग मामले की जांच कर सकता है।
AI और BI टूल्स आंकड़ों के विश्लेषण और संदिग्ध पैटर्न की पहचान करने में सहायता करेंगे। इससे विभागों को उन मामलों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है, जहां राजस्व के नुकसान या कर अपवंचन की आशंका हो।
हालांकि, प्रणाली से प्राप्त संकेत अपने आप में किसी व्यक्ति या कारोबारी के खिलाफ कर चोरी का प्रमाण नहीं होंगे। किसी भी मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित विभागों की जांच और लागू नियमों के आधार पर की जाएगी।
राजस्व संग्रहण में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान Choice Consultancy Services Private Limited के प्रतिनिधि सुभाष पाठक ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से IRIS प्रणाली की तकनीकी संरचना और कार्यप्रणाली की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों के डेटाबेस और ऑनलाइन पोर्टल को जोड़ने से राजस्व संबंधी सूचनाओं का समेकित विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे संभावित कर अपवंचन और राजस्व ह्रास की पहचान करने तथा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में संयुक्त सचिव पूनम कुजूर, राज्य-कर अपर आयुक्त दिलीप कुमार मंडल, जीवनारायण मंडल सहित वाणिज्य-कर विभाग के अन्य पदाधिकारी और कंसल्टेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
झारखंड के राजस्व तंत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
झारखंड खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है। राज्य के विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त राजस्व जुटाना महत्वपूर्ण है।
IRIS प्रणाली लागू होने के बाद विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर बनाने, राजस्व संबंधी विसंगतियों की पहचान करने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, परियोजना की वास्तविक सफलता इसके समय पर विकास, विभिन्न विभागों के पोर्टल के प्रभावी एकीकरण, डेटा की गुणवत्ता और प्राप्त सूचनाओं पर होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
फिलहाल, राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए नया सिस्टम इंटीग्रेटर चुनकर तकनीक आधारित राजस्व निगरानी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई प्रणाली झारखंड के राजस्व संग्रहण और कर अपवंचन पर नियंत्रण में कितना प्रभावी योगदान देती है।
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