दुमका में 12 महीने से वेतन नहीं मिलने पर आउटसोर्सिंग स्वास्थ्यकर्मियों का हल्ला बोल, झाड़ू-कुदाल लेकर श्रम अधीक्षक कार्यालय पहुंचे
दुमका: झारखंड के दुमका में आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों के 12 महीने से लंबित वेतन भुगतान का मामला गरमा गया है। बकाया वेतन की मांग को लेकर गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को पैरामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन, झारखंड के बैनर तले सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों ने श्रम अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान कर्मियों ने हाथों में झाड़ू, कुदाल और धम्मा लेकर सांकेतिक श्रमदान किया और अपना विरोध दर्ज कराया।
दुमका: झारखंड के दुमका में आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों के 12 महीने से लंबित वेतन भुगतान का मामला गरमा गया है। बकाया वेतन की मांग को लेकर गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को पैरामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन, झारखंड के बैनर तले सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों ने श्रम अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान कर्मियों ने हाथों में झाड़ू, कुदाल और धम्मा लेकर सांकेतिक श्रमदान किया और अपना विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कर्मियों ने जल्द से जल्द बकाया वेतन का भुगतान करने और जिम्मेदार आउटसोर्सिंग एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
अमित मंडल के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन
इस आंदोलन का नेतृत्व गोड्डा के पूर्व विधायक अमित मंडल ने किया। प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए दुमका के पूर्व सांसद सुनील सोरेन, भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेश मंडल और पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मियों से लगातार सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन उन्हें महीनों से वेतन नहीं मिला है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें अपने ही मेहनताने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
‘12 महीने से बिना वेतन के काम कर रहे कर्मी’
पूर्व विधायक अमित मंडल ने कहा कि पारा मेडिकल कर्मियों ने कोरोना काल से लेकर मलेरिया जैसी बीमारियों के दौरान भी अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा की है। इसके बावजूद उन्हें 12 महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप बेहद गंभीर है।
उन्होंने कहा कि वेतन के अभाव में कर्मचारियों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। इसी कारण कर्मियों ने श्रमदान के माध्यम से सरकार और संबंधित विभागों का ध्यान अपनी समस्या की ओर आकर्षित करने का निर्णय लिया है।
अमित मंडल ने स्वास्थ्य विभाग की आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कंपनियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। ये आरोप भाजपा और आंदोलनकारियों की ओर से लगाए गए हैं।
स्वास्थ्य और श्रम मंत्रियों पर साधा निशाना
प्रदर्शन के दौरान अमित मंडल ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और श्रम मंत्री संजय यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से वेतन का इंतजार कर रहे पारा मेडिकल कर्मियों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
उन्होंने श्रम विभाग पर भी कर्मचारियों की शिकायतों को लेकर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने इसे श्रमिकों के हितों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों का पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।
आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कार्रवाई की मांग
पैरामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन ने बकाया वेतन को लेकर कई मांगें रखी हैं। एसोसिएशन के अनुसार, बिरसा सिक्योरिटी, शिवा प्रोटेक्शन, कमांडो और BMR जैसी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन लंबित है।
कर्मियों की प्रमुख मांगें हैं:
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12 महीने के बकाया वेतन का भुगतान: सभी संबंधित कर्मचारियों का लंबित वेतन एकमुश्त HRIS के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाए।
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आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर कार्रवाई: एसोसिएशन ने संबंधित कंपनियों के खिलाफ आर्थिक अपराध के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें काली सूची में डालने की मांग की है।
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EPF और ESIC का लाभ: सभी कर्मियों को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) और न्यूनतम मजदूरी का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन और अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराना संबंधित एजेंसियों और विभाग की जिम्मेदारी है।
सात दिनों का अल्टीमेटम, हड़ताल की चेतावनी
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। एसोसिएशन के मुताबिक, संथाल परगना सहित पूरे झारखंड में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है।
इसके अलावा, उपायुक्त कार्यालय के समक्ष झाड़ू और कुदाल के साथ अनशन करने की भी चेतावनी दी गई है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी आगे स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
अब सरकार और विभाग के फैसले पर नजर
दुमका में हुए इस प्रदर्शन ने आउटसोर्सिंग स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन भुगतान और श्रम अधिकारों का मुद्दा फिर चर्चा में ला दिया है। कर्मचारियों की मांग है कि उनके बकाया वेतन का जल्द भुगतान हो और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, श्रम विभाग और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। सात दिनों के अल्टीमेटम के बाद आंदोलनकारियों की अगली रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी।
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