बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से, 4 दिसंबर तक चलेगी कार्यवाही; सम्राट सरकार के सामने होंगे कई अहम मुद्दे

बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक चलेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पांच दिनों के सत्र में विधायी कार्यों के साथ जनहित के मुद्दों पर चर्चा की संभावना है।

Oct 29, 2026 - 12:49
बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से, 4 दिसंबर तक चलेगी कार्यवाही; सम्राट सरकार के सामने होंगे कई अहम मुद्दे

पटना: बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही को लेकर हलचल तेज होने वाली है। बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर 2026 तक चलेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र में विधानसभा और विधान परिषद की कुल पांच बैठकें प्रस्तावित हैं।

इस सत्र को राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सदन में सरकार को विधायी कार्य आगे बढ़ाने और अपनी योजनाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। वहीं, विपक्ष भी जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार से जवाब मांग सकता है। ऐसे में सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर बहस देखने को मिल सकती है।

पांच दिनों तक चलेगी सदन की कार्यवाही

बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से शुरू होगा और 4 दिसंबर को समाप्त होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पांच दिनों के दौरान सदन की कुल पांच बैठकें होंगी। इन बैठकों में सरकारी कामकाज, विधायी प्रस्तावों और अन्य निर्धारित विषयों पर चर्चा की जा सकती है।

सत्र के विस्तृत एजेंडे और कार्यसूची से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन विधेयकों को सदन में पेश किया जाएगा और किन मुद्दों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित किया जाएगा।

सम्राट चौधरी सरकार की प्राथमिकताओं पर रहेगी नजर

शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के विधायी एजेंडे पर सबकी नजर रहेगी। राज्य में विकास योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कानून-व्यवस्था और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर सदन में सवाल उठाए जा सकते हैं।

हालांकि, इन विषयों पर चर्चा की आधिकारिक पुष्टि विस्तृत कार्यसूची जारी होने के बाद ही हो सकेगी। सरकार की ओर से किन प्रस्तावों और विधेयकों को प्राथमिकता दी जाती है, यह भी सत्र के दौरान महत्वपूर्ण रहेगा।

विधानसभा में प्रश्नकाल और अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाने का अवसर मिलेगा। इससे विभिन्न विभागों के कामकाज और सरकार के फैसलों पर चर्चा का रास्ता खुलेगा।

विपक्ष भी उठा सकता है जनहित के मुद्दे

शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष सरकार की नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और जनसमस्याओं को लेकर सवाल उठा सकता है। रोजगार, महंगाई, किसानों की समस्याएं, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और कानून-व्यवस्था जैसे विषय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

विपक्ष की ओर से सरकार से जवाब मांगने और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कराने की कोशिश की जा सकती है। वहीं, सत्ता पक्ष अपने फैसलों और योजनाओं के पक्ष में सदन में अपना पक्ष रखेगा। हालांकि, किन मुद्दों पर कितना समय मिलेगा, यह सदन की कार्यसूची और निर्धारित प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

विधान परिषद में भी दिख सकती है नई राजनीतिक तस्वीर

हाल में विधान परिषद की सीटों पर संपन्न चुनावों के बाद सदन की कार्यवाही में नए सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। नए सदस्यों के शामिल होने से विभिन्न मुद्दों पर उनकी भागीदारी और सवालों पर भी नजर रहेगी।

विधान परिषद में उठने वाले विषयों के माध्यम से राज्य सरकार के विभागों के कामकाज और नीतिगत फैसलों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, संबंधित सदस्यों की भागीदारी और उनके द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों की जानकारी सत्र के दौरान ही स्पष्ट होगी।

मानसून सत्र के बाद अब शीतकालीन सत्र की तैयारी

इससे पहले बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित किया गया था। अब नवंबर के अंतिम दिन से शुरू होने वाला शीतकालीन सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

पांच दिनों की कार्यवाही में सरकार को अपने विधायी प्रस्ताव आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। वहीं, विपक्ष को जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने का मौका मिलेगा।

अब नजर सत्र की विस्तृत कार्यसूची पर है। सरकार कौन-कौन से विधेयक पेश करती है, किन मुद्दों पर सदन में चर्चा होती है और विपक्ष किन सवालों को प्रमुखता से उठाता है, यह 30 नवंबर से शुरू होने वाली कार्यवाही के दौरान स्पष्ट होगा।

मुख्य जानकारी

  • सत्र की शुरुआत: 30 नवंबर 2026

  • सत्र का समापन: 4 दिसंबर 2026

  • अवधि: पांच दिन

  • बैठकें: कुल पांच प्रस्तावित बैठकें

  • मुख्य फोकस: विधायी कार्य, सरकारी एजेंडा और जनहित के मुद्दे

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