LAMPS-PACS के जरिए बीज कारोबार से बढ़ेगी कमाई? झारखंड में 11% मार्जिन को लेकर जानें पूरी बात
रांची: झारखंड में किसानों को कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली LAMPS और PACS समितियों के लिए बीज कारोबार आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। इन समितियों के जरिए किसानों तक बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री पहुंचाई जाती है। अब सहकारी संस्थाओं की कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। बीज कारोबार में 11 प्रतिशत मार्जिन मिलने की चर्चा के बीच यह विषय महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, इस मार्जिन की दर और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
रांची: झारखंड में किसानों को कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली LAMPS और PACS समितियों के लिए बीज कारोबार आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। इन समितियों के जरिए किसानों तक बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री पहुंचाई जाती है। अब सहकारी संस्थाओं की कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। बीज कारोबार में 11 प्रतिशत मार्जिन मिलने की चर्चा के बीच यह विषय महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, इस मार्जिन की दर और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
केंद्र सरकार सहकारी समितियों को बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ सहकारी संस्थाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।
क्या हैं LAMPS और PACS?
LAMPS का पूरा नाम Large Area Multipurpose Cooperative Society है, जबकि PACS का अर्थ Primary Agricultural Credit Society है। ये ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को कृषि ऋण, कृषि सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली सहकारी संस्थाएं हैं।
इन समितियों के माध्यम से किसानों को बीज और खाद वितरण के साथ-साथ धान खरीद, भंडारण तथा अन्य कृषि संबंधी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। केंद्र सरकार की ओर से PACS को विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी गई है, जिससे उनकी आय के स्रोत बढ़ सकें।
बीज कारोबार से कैसे बढ़ सकती है समितियों की कमाई?
कृषि कार्यों में बीज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बुवाई के मौसम में किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना जरूरी होता है। ऐसे में LAMPS-PACS के माध्यम से बीज वितरण की व्यवस्था किसानों के लिए सुविधाजनक हो सकती है।
यदि संबंधित नियमों के तहत बीज बिक्री पर 11 प्रतिशत मार्जिन निर्धारित है, तो पात्र समितियों को बिक्री के अनुपात में कारोबार से आय प्राप्त हो सकती है। हालांकि, वास्तविक कमाई बीज की बिक्री, लागू मार्जिन की गणना, परिचालन खर्च और संबंधित विभाग के नियमों पर निर्भर करेगी।
ध्यान दें: 11 प्रतिशत मार्जिन की दर की पुष्टि करने वाला आधिकारिक आदेश उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला है। इसलिए इसे फिलहाल पुष्ट सरकारी निर्णय के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
झारखंड में 4,459 PACS को लेकर अहम जानकारी
केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की ओर से 3 फरवरी 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, झारखंड में कुल 4,459 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) दर्ज थीं। इन समितियों को बीज और खाद वितरण सहित विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की पात्रता है।
सरकार सहकारी समितियों के कामकाज में विविधता लाने, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करने और ग्रामीण स्तर पर उनकी भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रही है। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर सेवाएं उपलब्ध कराने और समितियों के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है।
केवल बीज ही नहीं, अन्य कारोबार से भी आय बढ़ाने का अवसर
PACS के माध्यम से बीज और खाद वितरण के अलावा कई दूसरी गतिविधियां भी संचालित की जा सकती हैं। इनमें कृषि उपज का भंडारण, धान खरीद, गोदाम संचालन, कॉमन सर्विस सेंटर और अन्य पात्र व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं।
केंद्र सरकार सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत पात्र समितियों के स्तर पर गोदाम और कृषि से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने की पहल की गई है। इससे किसानों को उपज के भंडारण और विपणन में सहायता मिल सकती है।
किसानों और सहकारी समितियों को क्या होगा फायदा?
यदि बीज कारोबार में निर्धारित मार्जिन की व्यवस्था लागू होती है, तो इससे सहकारी समितियों को अतिरिक्त व्यावसायिक आय का अवसर मिल सकता है। वहीं, किसानों को स्थानीय स्तर पर बीज उपलब्ध होने से खरीदारी में सुविधा मिल सकती है।
हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी समितियां इस व्यवस्था के लिए पात्र हैं, किन बीजों की बिक्री की अनुमति है और मार्जिन से संबंधित नियम क्या हैं।
आधिकारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी 11% मार्जिन की स्थिति
झारखंड में LAMPS-PACS के माध्यम से बीज कारोबार को बढ़ावा देना सहकारी संस्थाओं की आर्थिक मजबूती और किसानों तक कृषि सामग्री पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। लेकिन 11 प्रतिशत मार्जिन की दर, पात्रता और लागू होने की तारीख की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग के आधिकारिक आदेश का इंतजार करना जरूरी है।
फिलहाल, बीज कारोबार से अतिरिक्त आय की संभावना पर चर्चा के बीच सहकारी समितियों की व्यावसायिक गतिविधियों को मजबूत बनाने का मुद्दा महत्वपूर्ण है।
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