वैशाली में गरीबों के राशन पर बड़ा सवाल! सरकारी गोदाम में सड़ रहा चावल, PDS दुकानदारों ने भी जताई नाराजगी
वैशाली, बिहार: बिहार के वैशाली जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब परिवारों को दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि भारतीय खाद्य निगम की व्यवस्था से जुड़े बिहार राज्य खाद्य निगम (SFC) के गोदामों में रखा चावल खराब हो रहा है और इसके बावजूद इसे जन वितरण प्रणाली की दुकानों तक भेजा जा रहा है। चावल में कीड़े मिलने, अनाज खराब होने और कम तौल की शिकायतों ने सरकारी राशन वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वैशाली, बिहार: बिहार के वैशाली जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब परिवारों को दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि भारतीय खाद्य निगम की व्यवस्था से जुड़े बिहार राज्य खाद्य निगम (SFC) के गोदामों में रखा चावल खराब हो रहा है और इसके बावजूद इसे जन वितरण प्रणाली की दुकानों तक भेजा जा रहा है। चावल में कीड़े मिलने, अनाज खराब होने और कम तौल की शिकायतों ने सरकारी राशन वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला सामने आने के बाद गरीब परिवारों को मिलने वाले सरकारी अनाज की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। आरोप है कि जिन लोगों के लिए सरकार मुफ्त अनाज उपलब्ध करा रही है, उन्हीं तक खराब गुणवत्ता वाला चावल पहुंच रहा है।
बेलसर के गोदाम में चावल खराब होने का आरोप
वैशाली जिले के बेलसर प्रखंड क्षेत्र स्थित एसएफसी के सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) गोदाम में बड़ी मात्रा में चावल रखे होने और उसके खराब होने का आरोप लगाया गया है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, गोदाम में रखे हजारों क्विंटल अरवा चावल की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
गोदाम में काम करने वाले कुछ मजदूरों का भी दावा है कि चावल की स्थिति ऐसी है कि उसे खाना मुश्किल है। इसके बावजूद आरोप है कि इसी चावल को जन वितरण प्रणाली की दुकानों तक भेजा जा रहा है। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह अनाज के भंडारण और वितरण व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है।
सहदेई बुजुर्ग में PDS दुकानदारों की शिकायत
वैशाली के सहदेई बुजुर्ग क्षेत्र से भी राशन वितरण को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि चावल का वजन कम होने और उसमें कीड़े मिलने की शिकायत के बाद पीडीएस दुकानदारों ने नाराजगी जताई।
राशन दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें गोदाम से ही खराब गुणवत्ता वाला चावल मिल रहा है। ऐसे में उनके सामने भी समस्या खड़ी हो रही है कि वे उपभोक्ताओं को किस तरह का अनाज वितरित करें। हालांकि, चावल की गुणवत्ता, तौल में कमी और वितरण प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की आधिकारिक जांच तथा संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना जरूरी है।
महनार में भी उठे चावल की गुणवत्ता पर सवाल
जिले के महनार क्षेत्र से भी इसी तरह की समस्या सामने आने का दावा किया गया है। यहां भी सरकारी राशन के चावल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
लगातार अलग-अलग क्षेत्रों से शिकायतें सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गोदामों में अनाज के भंडारण, उसकी गुणवत्ता की जांच और पीडीएस दुकानों तक आपूर्ति की निगरानी किस तरह की जा रही है।
अगर चावल गोदाम से ही खराब हालत में भेजा जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। वहीं, यदि वितरण के दौरान अनाज की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, तो उस स्तर पर भी जांच की जानी चाहिए।
मंत्री के बयान के बाद व्यवस्था पर सवाल
पटना में आयोजित एक बैठक के दौरान बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र रौशन द्वारा गरीबों को मिलने वाले अनाज की गुणवत्ता का मुद्दा उठाए जाने की बात सामने आई है। इस मुद्दे के बाद सरकारी राशन वितरण व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सरकार की मुफ्त राशन योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में राशन की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें सामने आना चिंता का विषय है। योजना का लाभ तभी प्रभावी होगा, जब पात्र परिवारों को निर्धारित मात्रा में साफ और खाने योग्य अनाज मिले।
जांच और कार्रवाई की मांग
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोदामों में चावल की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई। यदि खराब चावल को जानबूझकर वितरण के लिए भेजा गया है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
इसके साथ ही चावल की खरीद, मिलिंग, भंडारण, परिवहन और वितरण की पूरी प्रक्रिया की जांच किए जाने की जरूरत है। गोदामों में रखे अनाज के नमूनों की जांच कराई जाए और गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले चावल को वितरण से रोका जाए।
स्थानीय स्तर पर आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि इस व्यवस्था में कई स्तरों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, किसी अधिकारी, मिलर या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता को जांच के निष्कर्षों के बिना साबित नहीं माना जा सकता।
गरीबों के निवाले की गुणवत्ता कौन तय करेगा?
वैशाली में सामने आई शिकायतों ने सरकारी राशन वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिन परिवारों के लिए मुफ्त राशन आर्थिक सहारा है, उनके हिस्से में खराब अनाज पहुंचने की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग इन आरोपों की जांच के लिए क्या कदम उठाते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गोदामों में रखे चावल की गुणवत्ता की जांच कराई जाती है या नहीं और शिकायतें सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
सबसे अहम सवाल यही है कि गरीब परिवारों को मिलने वाला सरकारी चावल खाने योग्य और निर्धारित मात्रा में कब सुनिश्चित होगा?
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