कटिहार में अग्निपीड़ितों को राहत के नाम पर एक्सपायरी सामान! 10 परिवार बेघर, 24 घंटे बाद भी भोजन का इंतजार
बिहार के कटिहार जिले में अगलगी की घटना ने दस परिवारों को बेघर कर दिया है। फलका प्रखंड के भंगहा गांव में आग लगने से घरों के साथ कपड़े, अनाज, नकदी और गृहस्थी का सामान जलकर राख हो गया। हादसे के बाद प्रभावित परिवार भोजन और जरूरी सामान के लिए परेशान हैं। इस बीच, मंगलवार को अंचल प्रशासन की ओर से पहुंचाई गई राहत किट में एक्सपायरी सामग्री होने का आरोप सामने आया है। इससे राहत व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
‘मम्मी-मम्मी, भूख लगी है’ की पुकार से छलका मां का दर्द, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांगी
बिहार के कटिहार जिले में अगलगी की घटना ने दस परिवारों को बेघर कर दिया है। फलका प्रखंड के भंगहा गांव में आग लगने से घरों के साथ कपड़े, अनाज, नकदी और गृहस्थी का सामान जलकर राख हो गया। हादसे के बाद प्रभावित परिवार भोजन और जरूरी सामान के लिए परेशान हैं। इस बीच, मंगलवार को अंचल प्रशासन की ओर से पहुंचाई गई राहत किट में एक्सपायरी सामग्री होने का आरोप सामने आया है। इससे राहत व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
राहत किट में एक्सपायरी सामान मिलने का आरोप
अगलगी से प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से दी गई राहत किट में कुछ ऐसी सामग्री थी, जिसकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। पीड़ितों के अनुसार, किट में मौजूद लाइफबॉय साबुन की वैधता 5 फरवरी 2026 और टाइड सर्फ की वैधता अगस्त 2025 में समाप्त हो चुकी थी। वहीं, डिटॉल लिक्विड की वैधता भी इसी महीने समाप्त होने वाली बताई गई।
पीड़ित परिवारों ने राहत सामग्री की गुणवत्ता और वैधता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि आपदा के समय मिलने वाली सहायता उपयोगी और सुरक्षित होनी चाहिए। परिवारों ने प्रशासन से जल्द खाद्यान्न और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की अपील की है।
‘मम्मी-मम्मी, भूख लगी है’, बच्चों की पुकार से बेबस मां का छलका दर्द
अगलगी के बाद सबसे मुश्किल स्थिति उन परिवारों की है, जिनके घरों में छोटे बच्चे हैं। आग में घर और खाने-पीने का सामान नष्ट हो जाने के कारण परिवारों के सामने रोजमर्रा के भोजन का संकट खड़ा हो गया है।
उपेंद्र महलदार की पत्नी तेतरी देवी के बच्चों को जब भूख लगती है और वे खाना मांगते हैं, तो मां के सामने बेबसी की स्थिति बन जाती है। पीड़ित परिवार के मुताबिक, तेतरी देवी बच्चों को सीने से लगाकर कहती हैं, “बेटा, सब कुछ जल गया है, पानी पीकर पेट भर लो।”
यह स्थिति अगलगी से प्रभावित परिवारों की परेशानी को बयां करती है। घर उजड़ने के बाद अब उन्हें बच्चों के भोजन और सिर छिपाने की व्यवस्था की चिंता सता रही है।
घर के साथ नकदी भी जली, खेती की रकम चुकाने की चिंता
अगलगी से प्रभावित सिकंदर महलदार की पत्नी अरबिना देवी की परेशानी भी कम नहीं है। घर के साथ नकदी जल जाने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्हें किसानों के बकाये और खेती के लिए ली गई जमीन की लीज की रकम चुकाने की चिंता सता रही है।
इसके अलावा उषा देवी, धर्मेंद्र कुमार, देवेंद्र कुमार, मंटू शर्मा, अरविंद कुमार शर्मा, मिथिलेश शर्मा, गौतम शर्मा और भोला शर्मा समेत अन्य प्रभावित परिवार भी इस हादसे के बाद मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवार
आग में घर जल जाने के बाद कई परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। जरूरी सामान नष्ट होने से उन्हें दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भोजन, कपड़े और रहने की व्यवस्था के अभाव में प्रभावित परिवार प्रशासन और समाजसेवियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
पीड़ितों ने मांग की है कि उन्हें तत्काल राशन, भोजन और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को राहत मिल सके।
प्रशासन से तत्काल सहायता की मांग
भंगहा गांव में अगलगी से प्रभावित परिवारों की स्थिति ने आपदा के बाद राहत वितरण की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ितों की मांग है कि राहत किट में शामिल सामग्री की जांच कराई जाए और यदि एक्सपायरी सामान दिए जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल प्रभावित परिवारों को भोजन, राशन और जरूरी सहायता की जरूरत है। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है।
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