रांची के अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए नया आदेश, 7 दिनों में फीस और डॉक्टरों की डिग्री दिखाना अनिवार्य

रांची के सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को 7 दिनों के भीतर निबंधन प्रमाणपत्र, इलाज की फीस, डॉक्टरों की डिग्री व विशेषज्ञता और मरीजों के अधिकारों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी। सिविल सर्जन कार्यालय ने 29 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर निरीक्षण के दौरान नियमों के अनुपालन की जांच करने का निर्देश दिया है।

Oct 29, 2026 - 17:48
रांची के अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए नया आदेश, 7 दिनों में फीस और डॉक्टरों की डिग्री दिखाना अनिवार्य

रांची: राजधानी रांची में संचालित अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को अब मरीजों के हित में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रांची के कार्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए सभी संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को सात दिनों के भीतर निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

29 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश संख्या 5236 के अनुसार, चिकित्सा संस्थानों को अपना वैध निबंधन प्रमाणपत्र, इलाज की दर सूची, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का विवरण, विशेषज्ञता और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी प्रमुख स्थान पर लगानी होगी। आदेश का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों को इलाज से जुड़ी जरूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है।

अस्पतालों के रिसेप्शन पर दिखाना होगा निबंधन प्रमाणपत्र

सिविल सर्जन कार्यालय के निर्देश के मुताबिक, प्रत्येक संबंधित अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक को सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी वैध एवं अद्यतन निबंधन प्रमाणपत्र या लाइसेंस ऐसी जगह प्रदर्शित करना होगा, जहां मरीजों और उनके परिजनों की आसानी से नजर पड़े।

अस्पताल के रिसेप्शन या किसी अन्य प्रमुख स्थान पर प्रमाणपत्र लगाने से मरीजों को संबंधित चिकित्सा संस्थान की वैधानिक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े नियमों के अनुपालन और संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इलाज की फीस और जांच के खर्च का देना होगा पूरा विवरण

इस आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू चिकित्सा सेवाओं की दरों को सार्वजनिक करना है। सभी संबंधित संस्थानों को अद्यतन और मदवार रेट चार्ट प्रदर्शित करना होगा।

इसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शुल्कों की जानकारी शामिल होगी:

  • डॉक्टरों की परामर्श फीस।

  • विभिन्न मेडिकल जांचों के शुल्क।

  • चिकित्सा प्रक्रियाओं से संबंधित खर्च।

  • अस्पताल में बेड का शुल्क।

  • अन्य लागू चिकित्सा सेवाओं के चार्ज।

रेट चार्ट ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जहां मरीज और उनके परिजन उसे आसानी से देख सकें। इससे इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

हालांकि, आदेश में किसी विशेष जांच या चिकित्सा सेवा की फीस निर्धारित नहीं की गई है। इसका उद्देश्य अस्पतालों और क्लीनिकों को अपनी लागू दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के लिए निर्देशित करना है।

डॉक्टरों की डिग्री और विशेषज्ञता की जानकारी भी होगी सार्वजनिक

अब मरीजों को अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध डॉक्टरों की योग्यता तथा विशेषज्ञता से जुड़ी जानकारी भी प्रमुख स्थान पर मिल सकेगी।

निर्देश के अनुसार, डॉक्टरों का नाम, चिकित्सा संबंधी शैक्षणिक योग्यता, संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का विवरण, विशेषज्ञता और परामर्श अथवा ड्यूटी का समय प्रदर्शित करना होगा।

इस व्यवस्था से मरीजों को यह समझने में आसानी होगी कि संबंधित संस्थान में कौन-से डॉक्टर उपलब्ध हैं और वे किस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं। मरीज अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरत के अनुसार डॉक्टर से परामर्श लेने का निर्णय भी बेहतर जानकारी के आधार पर कर सकेंगे।

मरीजों के अधिकार और शिकायत की व्यवस्था भी बतानी होगी

सिविल सर्जन कार्यालय का आदेश केवल फीस और डॉक्टरों के विवरण तक सीमित नहीं है। संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं की जानकारी के साथ मरीजों के अधिकारों तथा शिकायत निवारण की व्यवस्था से संबंधित जरूरी विवरण भी प्रदर्शित करने होंगे।

इसका उद्देश्य मरीजों और उनके परिजनों को यह बताना है कि इलाज के दौरान किसी तरह की समस्या होने पर शिकायत कहां और किस माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता के लिहाज से यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं, लागू शुल्क और शिकायत निवारण की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

ज्योति शर्मा के अनुरोध के बाद जारी हुआ आदेश

कार्यालय आदेश में बताया गया है कि सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा के आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से प्राप्त अनुरोध के संदर्भ में यह निर्देश जारी किया गया है। अनुरोध में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (Clinical Establishments Act-CEA) के प्रावधानों के अनुपालन का मुद्दा उठाया गया था।

इसके बाद रांची जिले में संचालित सभी संबंधित नर्सिंग होम, अस्पतालों, क्लीनिकों और लागू नियमों के दायरे में आने वाले अन्य चिकित्सा प्रतिष्ठानों को आवश्यक जानकारियां प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया।

आदेश की प्रतिलिपि रांची के उपायुक्त, संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों और निरीक्षण अधिकारियों को भेजी गई है। ज्योति शर्मा को भी उनके अनुरोध के संदर्भ में आदेश की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई गई है।

सात दिनों में करना होगा आदेश का पालन, निरीक्षण में होगी जांच

सिविल सर्जन कार्यालय ने सभी संबंधित संस्थानों को आदेश जारी होने की तारीख से सात दिनों के भीतर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। इसके साथ ही, इन व्यवस्थाओं को लगातार बनाए रखना होगा।

संबंधित निरीक्षण प्राधिकारियों और नामित अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान यह जांचने की जिम्मेदारी दी गई है कि अस्पतालों और क्लीनिकों में जरूरी जानकारियां प्रदर्शित की गई हैं या नहीं।

यदि निरीक्षण के दौरान कोई कमी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसकी जानकारी सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को दी जाएगी। इसके बाद लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई की जा सकती है।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन से मरीजों को इलाज की फीस, डॉक्टरों की योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं और अस्पताल के निबंधन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में आसानी हो सकती है। साथ ही, शिकायत निवारण की व्यवस्था सार्वजनिक होने से मरीजों को अपनी समस्या के समाधान के लिए उचित माध्यम तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि रांची के अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक सात दिनों की निर्धारित समयसीमा में आदेश का कितना पालन करते हैं। निरीक्षण के दौरान होने वाली जांच यह सुनिश्चित करने में अहम होगी कि मरीजों को जरूरी जानकारी वास्तव में उपलब्ध कराई जा रही है या नहीं।

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