शब्दवीणा के मंच पर लेखिका अल्पना सिंह रचित 'मर्यादा', 'पिया बसंती रे', एवं 'तुमसे मिलकर' तीन उपन्यासों का हुआ भव्य लोकार्पण
तीन उपन्यासों का एक साथ लोकार्पण साहित्य जगत एवं समस्त शब्दवीणा परिवार के लिए एक गौरवपूर्ण एवं अविस्मरणीय अवसर
गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'शब्दवीणा' के मंच पर उपन्यास लेखिका अल्पना सिंह रचित 'मर्यादा', 'तुमसे मिलकर' और 'पिया बसंती रे' तीन उपन्यासों का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन शब्दवीणा की बिहार प्रदेश समिति एवं औरंगाबाद जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में पृथ्वीराज चौहान स्मृति भवन में हुआ। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने की तथा संयोजन, समन्वयन तथा कुशल संचालन शब्दवीणा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं औरंगाबाद जिला अध्यक्ष सुरेश विद्यार्थी ने किया। मंचासीन अतिथियों का अभिनंदन अंग वस्त्र, पुष्प हार तथा प्रतीक चिह्न प्रदान करके किया गया। शब्दवीणा की संस्थापक तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने उपन्यास लेखिका श्रीमती सिंह को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने शब्दवीणा के मंच पर तीन-तीन उपन्यासों के एक साथ लोकार्पण के शुभ अवसर को अत्यंत भव्य, गौरवपूर्ण एवं साहित्य जगत के लिए अविस्मरणीय बतलाया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में मनसा वाचा कर्मणा जुटे राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विद्यार्थी एवं समस्त शब्दवीणा औरंगाबाद जिला समिति के सभी पदाधिकारियों के सामूहिक प्रयत्नों की सराहना की। अल्पना सिंह ने सभी अतिथियों एवं शब्दवीणा परिवार के प्रति प्राप्त स्नेह, सहयोग, समर्थन, एवं उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक आभार जताया। श्रीमती सिंह ने अपने तीनों उपन्यासों को जीवन में मिले कटु-मधुर अनुभवों का शब्द-चित्रण बतलाया। कहा कि उनके उपन्यास पितृसत्तात्मक समाज के दोहरे चरित्र तथा उसी समाज में भेदभावपूर्ण जीवन जी रहीं नारियों के हृदय की वेदनाओं को मुखरित करते हैं। उपन्यास में स्त्रियों के जीवन में पग-पग पर मिलने वाली विभिन्न चुनौतियों को अंकित करने की कोशिश की गई है। अल्पना सिंह ने स्त्रियों के आत्मसम्मान की बात करते हुए कहा कि साहित्य उनके लिए मनोरंजन का विषय नहीं है। इस अवसर पर प्रोफेसर विजय कुमार सिंह, प्रदीप कुमार सिंह एवं डॉ हनुमान राम ने अल्पना सिंह के उपन्यासों की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि पुस्तक लेखन का कार्य इतना सरल नहीं होता। उन्होंने लेखन को एक अनवरत साधना बतलाते हुए अल्पना सिंह को उनकी तीन पुस्तकों के लोकार्पण पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। लोकार्पण समारोह का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर देश भर के साहित्यानुरागियों ने पुस्तक लेखिका एवं शब्दवीणा परिवार को अपनी शुभकामनाएं दीं। समारोह में मनभावन गीतों की फुहार ने सभी का मन मोह लिया। लोकार्पण समारोह में बिहार प्रदेश महोत्सव संघ के अध्यक्ष महोत्सव रत्न संजीव कुमार सिंह, प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ हनुमान राम, गणितज्ञ डॉ शिवपूजन सिंह, पर्यावरणविद् डॉ रामाधार सिंह, माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामभजन सिंह, जेएलएन कॉलेज डेहरी के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर विजय कुमार सिंह, जम्होर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि प्रदीप कुमार सिंह, पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश सिंह एवं रामप्रवेश सिंह, उद्घोषक आफताब राणा, अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह, साहित्य कुंज के केंद्रीय महासचिव अरविंद अकेला, राष्ट्रीय कवि स्पर्श मंच के अध्यक्ष श्रीराम राय, राज्य महोत्सव संघ के महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष श्वेता सिंह, डॉ रविंद्र कुमार, इंजीनियर श्रवण कुमार सिंह, पूर्व शिक्षा पदाधिकारी सुमन अग्रवाल, अष्टभुजी धाम के संरक्षक अजीत मिश्रा, संज्ञा समिति के अध्यक्ष अशोक पांडेय, मनोरमा देवी, आयुषी कुमारी, सुबोध कुमार पांडेय, वेद प्रकाश पांडेय, विकास कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह,शिक्षक नवीन कुमार, राजेश रंजन, सिंहेश सिंह, अशोक कुमार सिंह, कुमार विपिन, सत्यचंडी धाम के राजेंद्र सिंह एवं अमरेश सिंह, ओम प्रकाश शर्मा, जनार्दन मिश्र जलज ,चंद्रकांत सिंह, सुरेश ठाकुर, गगन गुप्ता, ओम प्रकाश पांडेय, सुरेंद्र वैद्य के साथ बड़ी संख्या में साहित्यानुरागियों की उपस्थिति रही।
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