पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान, ‘रेप की कोशिश’ से जुड़ी टिप्पणी पर नोटिस

नई दिल्ली। पटना हाईकोर्ट के एक फैसले में दुष्कर्म के प्रयास से जुड़ी टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। 9 जुलाई 2026 के फैसले में पटना हाईकोर्ट ने एक मामले में आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से राहत देते हुए कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376/511 के बजाय धारा 354 के तहत आता है।

Sep 24, 2026 - 12:43
पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान, ‘रेप की कोशिश’ से जुड़ी टिप्पणी पर नोटिस

नई दिल्ली:- पटना हाईकोर्ट के एक फैसले में दुष्कर्म के प्रयास से जुड़ी टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। 9 जुलाई 2026 के फैसले में पटना हाईकोर्ट ने एक मामले में आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से राहत देते हुए कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376/511 के बजाय धारा 354 के तहत आता है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के आदेश में की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर आपत्ति दर्ज की और कहा कि आरोपी का पक्ष सुनने के बाद संबंधित टिप्पणियों को हटाने पर विचार किया जा सकता है।

पटना हाईकोर्ट के 9 जुलाई के फैसले के अनुसार, मामले में आरोपी पर महिला के साथ जबरन शारीरिक व्यवहार करने, उसका सलवार हटाने की कोशिश करने और उसकी छाती दबाने के आरोप थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रत्यक्ष कृत्य साबित नहीं हुआ जो स्पष्ट रूप से दुष्कर्म के प्रयास की ओर ले जाता हो। अदालत ने इन कृत्यों को महिला की गरिमा भंग करने के उद्देश्य से आपराधिक बल के इस्तेमाल के रूप में देखते हुए IPC की धारा 354 के दायरे में माना था।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आरोपी को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने बिहार के महाधिवक्ता से कहा है कि स्थानीय पुलिस के माध्यम से आरोपी को नोटिस की तामील सुनिश्चित की जाए।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद अब हाईकोर्ट के फैसले में की गई संबंधित टिप्पणियों और मामले के कानूनी पहलुओं पर शीर्ष अदालत में आगे सुनवाई होगी।

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