चांडिल डैम का जलस्तर 180 RL के पार, धान की खड़ी फसल पर मंडराया डूबने का खतरा

सरायकेला: चांडिल डैम का जलस्तर एक बार फिर 180 RL की सीमा पार कर गया है। 23 सितंबर 2026 की शाम 4 बजे की रिपोर्ट के अनुसार डैम का जलस्तर 180.45 मीटर RL दर्ज किया गया, जबकि जलस्तर 180 मीटर से नीचे रखने की बात कही गई थी। डैम में फिलहाल 507.82 MCM पानी का भंडारण बताया गया है। जलस्तर बढ़ने से डूब क्षेत्र के किसानों और विस्थापित परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

Sep 24, 2026 - 13:33
चांडिल डैम का जलस्तर 180 RL के पार, धान की खड़ी फसल पर मंडराया डूबने का खतरा

सरायकेला:- चांडिल डैम का जलस्तर एक बार फिर 180 RL की सीमा पार कर गया है। 23 सितंबर 2026 की शाम 4 बजे की रिपोर्ट के अनुसार डैम का जलस्तर 180.45 मीटर RL दर्ज किया गया, जबकि जलस्तर 180 मीटर से नीचे रखने की बात कही गई थी। डैम में फिलहाल 507.82 MCM पानी का भंडारण बताया गया है। जलस्तर बढ़ने से डूब क्षेत्र के किसानों और विस्थापित परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

डैम से कुल 418.49 क्यूमेक्स पानी की निकासी की जा रही है। इसमें रेडियल गेट से 253.73 क्यूमेक्स, रिवर स्लूइस से 13.50 क्यूमेक्स, इमरजेंसी स्लूइस से 118.84 क्यूमेक्स और कैनाल से 32.42 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।

बार-बार 180 RL पार होने पर उठे सवाल

विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि इस मानसून में कई बार चांडिल डैम का जलस्तर 180 RL के ऊपर पहुंच चुका है। उनका कहना है कि मानसून से पहले जिला आपदा प्रबंधन की बैठक में जलस्तर को 180 RL से नीचे रखने, कंट्रोल रूम सक्रिय रखने और बाढ़ से निपटने की तैयारी के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद बार-बार जलस्तर बढ़ने पर उन्होंने डैम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

रोपनी के बाद अब कटनी के समय संकट

महतो के अनुसार, धान की रोपनी के समय भी जलस्तर बढ़ने से डूब क्षेत्र के कई निचले खेतों में पानी घुस गया था। अब फसल आधी पक चुकी है और कटाई का समय नजदीक है। ऐसे में दोबारा पानी बढ़ने से किसानों को तैयार फसल के नुकसान का डर सताने लगा है।

उन्होंने प्रभावित खेतों का तत्काल सर्वे कराने और फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।

विस्थापित परिवारों के लंबित मामलों का मुद्दा भी उठा

विस्थापित अधिकार मंच ने चांडिल डैम से जुड़े विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार के लंबित मामलों को भी उठाया है। मंच का दावा है कि कई परिवारों की विकास पुस्तिका अब तक नहीं बनी है, जबकि जिनकी विकास पुस्तिका बन चुकी है, उनमें भी कुछ को अनुदान राशि नहीं मिली है।

मंच ने जिला प्रशासन और डैम प्रबंधन से जल प्रबंधन में पारदर्शिता, जलस्तर को 180 RL से नीचे रखने तथा विस्थापितों के लंबित अधिकारों का जल्द समाधान करने की मांग की है।

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