सरकारी खर्च का हर रुपया सही काम में लगे, जवाबदेही तय हो: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
तिरुवनंतपुरम। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि जनता के खजाने से खर्च होने वाले प्रत्येक रुपये का पूरा हिसाब होना चाहिए और उसका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए, जिसके लिए राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ हैं तथा सरकारी खर्च का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उससे आम नागरिकों को कितना लाभ मिला।
तिरुवनंतपुरम। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि जनता के खजाने से खर्च होने वाले प्रत्येक रुपये का पूरा हिसाब होना चाहिए और उसका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए, जिसके लिए राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ हैं तथा सरकारी खर्च का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उससे आम नागरिकों को कितना लाभ मिला।
ओम बिरला मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में संसद और राज्य विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (PAC) के सभापतियों के सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक धन के उपयोग की निगरानी और सरकारी खर्च में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने में समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
वर्षों से लंबित ऑडिट आपत्तियों पर जताई चिंता
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कई ऑडिट आपत्तियां 10, 15 और यहां तक कि 20 वर्षों तक लंबित रहती हैं। ऐसी स्थिति व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से लंबित ऑडिट आपत्तियों के निपटारे के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की अपील की। साथ ही निगरानी, समीक्षा और कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित न रहे।
सरकारी योजनाओं के खर्च का परिणाम भी देखना जरूरी
ओम बिरला ने कहा कि लोक लेखा समितियों की जिम्मेदारी केवल सरकारी खातों और ऑडिट रिपोर्टों की जांच तक सीमित नहीं है। उन्हें यह भी देखना चाहिए कि स्वीकृत राशि से निर्धारित उद्देश्य पूरे हुए या नहीं।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के मामले में जरूरत पड़ने पर समितियों को निर्माण स्थलों का दौरा कर काम की गुणवत्ता, समय पर पूरा होने और निर्धारित मानकों के पालन की जांच करनी चाहिए।
इसी तरह, सामाजिक कल्याण योजनाओं में केवल खर्च की गई राशि देखने के बजाय यह भी आकलन करना जरूरी है कि योजनाओं से आम लोगों को वास्तविक लाभ मिला या नहीं।
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होनी चाहिए वित्तीय जवाबदेही
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोक लेखा समिति में विपक्ष के सदस्य को सभापति बनाने की परंपरा भारतीय लोकतंत्र की समावेशी और परिपक्व व्यवस्था का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य विचारधारा और नीतियों को लेकर अलग-अलग मत रख सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक धन की सुरक्षा के मामले में उनकी जिम्मेदारी साझा है। समितियों को संवाद, सहयोग और सहमति के आधार पर काम करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि PAC का उद्देश्य किसी व्यक्ति या सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग, बर्बादी और वित्तीय अनियमितताओं को रोकना है।
वित्तीय निगरानी में AI और तकनीक का इस्तेमाल
ओम बिरला ने लोक लेखा समितियों से वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीक का उपयोग करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि तकनीक के जरिए बड़ी मात्रा में सरकारी खर्च के आंकड़ों का विश्लेषण, संभावित वित्तीय अनियमितताओं की पहचान और ऑडिट आपत्तियों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकती है।
उन्होंने राज्यों से पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी के बेहतर तरीकों को साझा करने की भी अपील की, ताकि अन्य राज्य भी उनसे सीख सकें।
CAG रिपोर्ट और कार्रवाई रिपोर्ट की समीक्षा पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्टों की जांच, सरकार की कार्रवाई रिपोर्टों की समीक्षा और समितियों की सिफारिशों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करना PAC की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में होने वाली चर्चा से वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सरकारी खर्च की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए ठोस सुझाव सामने आएंगे।
सम्मेलन में केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, लोकसभा की लोक लेखा समिति के सभापति के. सी. वेणुगोपाल, केरलम विधानसभा अध्यक्ष थिरुवंचूर राधाकृष्णन सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। इस अवसर पर PAC सम्मेलन स्मारिका 2026 का भी विमोचन किया गया।
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