बिहार में बाढ़ और गाद की समस्या से निपटने की तैयारी तेज, नदियों की सफाई कर सड़क निर्माण में इस्तेमाल होगी मिट्टी; गडकरी के साथ MoU
पटना। बिहार में बाढ़ की समस्या और नदियों में लगातार जमा हो रही गाद से निपटने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने जलस्रोतों के पुनर्स्थापन और गाद प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत नदियों, बैराजों और जलाशयों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी। खास बात यह है कि नदियों से निकाली गई मिट्टी और गाद का इस्तेमाल सड़क निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं में किया जाएगा।
पटना। बिहार में बाढ़ की समस्या और नदियों में लगातार जमा हो रही गाद से निपटने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने जलस्रोतों के पुनर्स्थापन और गाद प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत नदियों, बैराजों और जलाशयों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी। खास बात यह है कि नदियों से निकाली गई मिट्टी और गाद का इस्तेमाल सड़क निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं में किया जाएगा।
इस पहल से एक ओर जलस्रोतों की क्षमता बहाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों के लिए मिट्टी की उपलब्धता भी बढ़ सकती है। बिहार सरकार ने सितंबर 2026 में बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति-2026 को मंजूरी दी थी।
दिल्ली में सम्राट चौधरी-नितिन गडकरी के बीच समझौता
इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए मंगलवार को नई दिल्ली में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद रहे।
समझौते के तहत बिहार की नदियों और जलस्रोतों से निकाली गई रेत, मिट्टी और अन्य उपयोगी सामग्री का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस पहल को बाढ़ नियंत्रण और सड़क निर्माण के लिए उपयोगी बताया है।
नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाने पर जोर
नई नीति के तहत नदियों, बैराजों, जलाशयों और अन्य जलस्रोतों में जमा गाद को वैज्ञानिक तरीके से हटाने की योजना है। इससे जलस्रोतों की जल वहन और जलधारण क्षमता बहाल करने में मदद मिल सकती है। साथ ही सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और बाढ़ के जोखिम को कम करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
बिहार में कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान और महानंदा जैसी नदियां कई जिलों में बाढ़ की चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे में गाद प्रबंधन को बाढ़ नियंत्रण की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है।
निर्माण कार्यों में भी होगा फायदा
इस पहल की खास बात यह है कि नदियों से निकाली गई गाद को बेकार सामग्री के रूप में नहीं छोड़ा जाएगा। उसकी उपयोगिता के अनुसार सड़क निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग, तटबंध और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इससे निर्माण कार्यों के लिए मिट्टी की उपलब्धता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर सामग्री जुटाने की लागत कम करने में मदद मिलने की संभावना है।
बाढ़ से राहत की दिशा में नई पहल
बिहार में हर साल बाढ़ से बड़े पैमाने पर जान-माल, फसल और संपत्ति का नुकसान होता है। ऐसे में सरकार की इस पहल को जल प्रबंधन और आधारभूत संरचना विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, गाद निकालने से बाढ़ की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, ऐसा अभी कहना जल्दबाजी होगी। इसके लिए नदी की प्रकृति, जल प्रवाह, गाद की मात्रा, तटबंधों की स्थिति और नेपाल से आने वाले पानी जैसे पहलुओं पर भी काम करना होगा।
फिलहाल बिहार सरकार की गाद प्रबंधन नीति और केंद्र के साथ हुआ समझौता राज्य में बाढ़ प्रबंधन तथा सड़क निर्माण को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
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