विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के समर्थन में शिक्षकों-कर्मचारियों का धरना समाप्त, प्रस्तावित उच्च शिक्षा अधिनियम-2026 के विरोध में 25 अगस्त तक चला दूसरा चरण, 5 सितंबर को छात्र-अभिभावक संवाद के साथ आंदोलन होगा समाप्त
गयाजी। बिहार के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों द्वारा बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 की स्वायत्तता के समर्थन तथा प्रस्तावित उच्च शिक्षा अधिनियम, 2026 के विरोध में चल रहे आंदोलन के दूसरे चरण का मंगलवार को समापन हो गया। आंदोलन के दूसरे चरण के तहत 11 अगस्त से 25 अगस्त तक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रतिदिन दोपहर 1:30 बजे से 2 बजे तक धरना दिया गया।
आंदोलन के प्रथम चरण में 5 से 8 अगस्त तक शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने काला-बिल्ला लगाकर विरोध जताया था। इसके बाद 10 अगस्त को बिहार के सभी विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहे और विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर एकत्रित होकर प्रस्तावित उच्च शिक्षा विधेयक, 2026 को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इसमें मगध विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग सहित विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों के हजारों शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने भाग लिया।
जगजीवन महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार, सचिव डॉ. संगीता कुमारी एवं संयुक्त सचिव डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र वातावरण में कार्य करने का अवसर मिलना जरूरी है। स्वायत्तता प्रभावित होने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान पर प्रतिकूल असर पड़ेगा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को भी नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में आवश्यक सुधार की जरूरत है। शिक्षक-छात्र अनुपात को बेहतर करने के साथ प्रयोगशालाओं, छात्रावासों और यातायात सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं लागू की जानी चाहिए।
शिक्षकों ने जगजीवन कॉलेज में जलजमाव की समस्या का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से कॉलेज प्रशासन को केवल आश्वासन मिला है। ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण महाविद्यालय का करीब तीन-चौथाई हिस्सा जलजमाव की चपेट में है।
वहीं, जगजीवन कॉलेज शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार, सचिव जफर अली एवं प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष राजीव कुमार भास्कर ने आंदोलन के दूसरे चरण की सफलता पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि कर्मचारी एकजुट थे, एकजुट हैं और आगे भी एकजुट रहेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अधिनियम में किसी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार ने समय रहते प्रस्तावित अधिनियम वापस नहीं लिया तो आंदोलन का अगला चरण और अधिक आक्रोशपूर्ण होगा।
इस अवसर पर डॉ. शिवकुमार रविदास, रवि रंजन, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. ऐजाज असलम सहित शिक्षकेत्तर कर्मियों में नागेंद्र कुमार, पंकज कुमार, अनिल कुमार, शिवनंदन कुमार, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे। आंदोलन 5 सितंबर को छात्र एवं अभिभावकों के साथ संवाद कार्यक्रम के बाद समाप्त होगा।