रांची में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज, मतदाता सूची को अधिक समावेशी और विश्वसनीय बनाने पर मंथन

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में बुधवार को मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची के प्रबंधन को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Voter Registration and Voter Registers 2026” का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का आयोजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड ने केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सहयोग से किया है। कार्यक्रम NUSRL, रांची में आयोजित किया जा रहा है।

Sep 2, 2026 - 17:42
रांची में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज, मतदाता सूची को अधिक समावेशी और विश्वसनीय बनाने पर मंथन

रांची:- झारखंड की राजधानी रांची में बुधवार को मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची के प्रबंधन को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Voter Registration and Voter Registers 2026” का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का आयोजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड ने केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सहयोग से किया है। कार्यक्रम NUSRL, रांची में आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल और सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर समेत कई शिक्षाविद्, शोधकर्ता और विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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800 से अधिक संस्थानों से संपर्क, 58 शोध-पत्र चयनित

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विमर्श करना है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संपर्क किया गया। इसके बाद 230 Abstracts प्राप्त हुए। स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति ने इनमें से 80 Abstracts को शॉर्टलिस्ट किया और अंततः 58 शोध-पत्रों को प्रकाशन एवं विचार-विमर्श के लिए चुना गया।

तकनीक से लेकर प्रवासी मतदाताओं तक पर चर्चा

सम्मेलन में नागरिकता, मतदाता पंजीकरण की वैश्विक व्यवस्थाओं, तकनीक, डेटा आधारित सत्यापन, मतदाता जागरूकता, लैंगिक मुद्दों, प्रवासी मतदाताओं और वंचित वर्गों की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है।

के. रवि कुमार ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में सक्रिय, स्वचालित और हाइब्रिड मतदाता पंजीकरण प्रणालियां अपनाई जा रही हैं। जनसंख्या डेटाबेस, सिविल रजिस्ट्री, बायोमेट्रिक्स और लगातार अपडेट होने वाली व्यवस्थाओं का उपयोग भी बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत में मतदाता सूची को अधिक मजबूत बनाने के लिए तकनीक और डेटाबेस आधारित सत्यापन का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि पूरी प्रक्रिया में क्षेत्रीय सत्यापन, राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों की सहभागिता तथा न्यायिक समीक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

“कोई पात्र नागरिक छूटे नहीं, कोई अपात्र शामिल न हो”

NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता का प्रवेश द्वार है। विश्वसनीय चुनाव के लिए शुद्ध, समावेशी और नियमित रूप से अपडेट होने वाली मतदाता सूची जरूरी है।

उन्होंने कहा कि तकनीक निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकती है, लेकिन इसे मानवीय विवेक और निर्णय का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए। लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।

युवाओं और प्रवासी मतदाताओं पर विशेष जोर

सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान मतदाता जागरूकता और नागरिक शिक्षा के जरिए लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने बढ़ते प्रवासन, शहरीकरण और तकनीकी बदलाव के बीच युवा मतदाताओं, प्रवासियों और वंचित समुदायों की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही डेटा की शुद्धता, निजता, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा की।

केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने कहा कि यह सम्मेलन अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि तकनीक और AI के बढ़ते इस्तेमाल से निर्वाचन प्रबंधन में नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

वहीं अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने कहा कि लोकतंत्र की पूरी प्रक्रिया के केंद्र में नागरिक और मतदाता होते हैं। इसलिए शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने झारखंड में चल रहे SIR का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है कि कोई पात्र नागरिक छूटे नहीं और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।

दो दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के अनुभवों, शोध और निर्वाचन प्रबंधन की व्यावहारिक चुनौतियों पर मंथन होगा। सम्मेलन से निकलने वाले महत्वपूर्ण निष्कर्षों को भविष्य के शोध और निर्वाचन प्रशासन के लिए ज्ञान-संसाधन के रूप में प्रकाशित किए जाने की योजना है।

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