करोड़ों की लागत से बना अस्पताल बना खंडहर, 19 साल में एक भी मरीज नहीं पहुंचा; असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले के खरौंधी प्रखंड में करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया सरकारी अस्पताल अब बदहाली की तस्वीर बन चुका है। वर्ष 2007 में तत्कालीन मधु कोड़ा सरकार के कार्यकाल में स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण के करीब दो दशक बाद भी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं।

Sep 29, 2026 - 16:12
करोड़ों की लागत से बना अस्पताल बना खंडहर, 19 साल में एक भी मरीज नहीं पहुंचा; असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले के खरौंधी प्रखंड में करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया सरकारी अस्पताल अब बदहाली की तस्वीर बन चुका है। वर्ष 2007 में तत्कालीन मधु कोड़ा सरकार के कार्यकाल में स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण के करीब दो दशक बाद भी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस उम्मीद के साथ अस्पताल भवन बनाया गया था, वह आज तक पूरी नहीं हो पाई। भवन लंबे समय से बंद पड़ा है और अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। आरोप है कि भवन में रखे कई कीमती सामान भी अज्ञात चोरों ने चोरी कर लिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल शुरू होने से ग्रामीणों को इलाज के लिए काफी राहत मिलती। लेकिन अस्पताल कभी खुला ही नहीं। अब यह भवन कथित तौर पर असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। इलाज के लिए लोगों को दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा जरूरत पड़ने पर रांची और बनारस तक जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में पर्याप्त परिवहन सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस भवन का उपयोग अब तक क्यों नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों ने अस्पताल को जल्द शुरू कराने और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

वहीं, मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, निर्माण के वर्षों बाद भी भवन का स्वास्थ्य विभाग को विधिवत हैंडओवर नहीं हुआ है।

गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. कैनेडी ने बताया कि यह भवन स्वास्थ्य विभाग का बनाया हुआ जरूर है, लेकिन उनके अनुसार भवन विभाग को कभी हैंडओवर नहीं किया गया। उन्होंने इसे काफी पुराना मामला बताया।

करोड़ों की लागत से तैयार भवन का वर्षों तक उपयोग नहीं होना और उसका खंडहर में तब्दील होना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और रखरखाव पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और खरौंधी के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा कब मिल पाती है।

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