JPSC परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा! पूर्व अध्यक्ष के बैग से मिली 15 अभ्यर्थियों की सूची, 10 का अंतिम चयन

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की जांच में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के लैपटॉप बैग से 15 अभ्यर्थियों की एक संदिग्ध सूची बरामद होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि इस सूची में अभ्यर्थियों के नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, साक्षात्कार की तारीख और उनके लिए प्रस्तावित पदों का विवरण दर्ज था। जांचकर्ताओं ने सूची का परीक्षा परिणाम से मिलान किया, जिसमें 15 में से 10 अभ्यर्थियों के अंतिम चयन की बात कही गई है।

Oct 26, 2026 - 09:34
JPSC परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा! पूर्व अध्यक्ष के बैग से मिली 15 अभ्यर्थियों की सूची, 10 का अंतिम चयन

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की जांच में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के लैपटॉप बैग से 15 अभ्यर्थियों की एक संदिग्ध सूची बरामद होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि इस सूची में अभ्यर्थियों के नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, साक्षात्कार की तारीख और उनके लिए प्रस्तावित पदों का विवरण दर्ज था। जांचकर्ताओं ने सूची का परीक्षा परिणाम से मिलान किया, जिसमें 15 में से 10 अभ्यर्थियों के अंतिम चयन की बात कही गई है।

सूची में पहले से दर्ज थे पदों के विवरण

रिपोर्ट के मुताबिक, कथित सूची में कुछ अभ्यर्थियों के सामने डीएसपी, झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) और झारखंड वित्त सेवा (JFS) जैसे पदों का उल्लेख था। जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि सूची किस परिस्थिति में तैयार की गई थी और उसमें दर्ज पदों का अंतिम परिणाम से क्या संबंध था।

यदि सूची में दर्ज विवरण और चयन परिणाम के बीच अनियमितता प्रमाणित होती है, तो यह परीक्षा की निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है।

15 में से 10 अभ्यर्थियों के चयन का दावा

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि कथित सूची में शामिल 15 अभ्यर्थियों में से 10 का 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में अंतिम चयन हुआ था। रिपोर्ट में सफल अभ्यर्थियों के नाम भी दिए गए हैं।

जांच के लिहाज से यह पता लगाना अहम है कि चयनित अभ्यर्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सफलता मिली या किसी स्तर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया। सूची में नाम होना या चयनित हो जाना अपने आप में किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। प्रत्येक मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही निर्णय लिया जाना चाहिए।

इंटरव्यू और परीक्षा केंद्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में

रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं ने कुछ अभ्यर्थियों के प्रारंभिक परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की। इसके अलावा, अभ्यर्थियों के साक्षात्कार की प्रक्रिया और संबंधित बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

इन पहलुओं की निष्पक्ष जांच इसलिए जरूरी है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रत्येक अभ्यर्थी को समान अवसर मिलना चाहिए। परीक्षा केंद्रों के रिकॉर्ड, उत्तर पुस्तिकाओं, ओएमआर शीट और साक्षात्कार से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

CID जांच में परीक्षा एजेंसियों और कथित वित्तीय लेन-देन की भी चर्चा

JPSC परीक्षा से जुड़ी जांच के दूसरे पहलुओं पर प्रकाशित रिपोर्टों में परीक्षा संचालन एजेंसियों को काम सौंपने, कथित कमीशन, ओएमआर शीट में हेराफेरी और अधिकारियों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। CID की चार्जशीट से संबंधित रिपोर्ट में भी परीक्षा संचालन और कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

इन आरोपों की कानूनी स्थिति और प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के आधिकारिक रिकॉर्ड तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।

अभ्यर्थियों के भविष्य और आयोग की विश्वसनीयता का सवाल

JPSC की परीक्षाएं झारखंड के हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में जाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। अभ्यर्थी वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की खबरें सामने आने से युवाओं के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

इस मामले में पारदर्शी जांच, साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण और आधिकारिक तथ्यों को सार्वजनिक करना जरूरी है। इससे न केवल आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी, बल्कि आयोग की चयन प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

निष्कर्ष: JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के लैपटॉप बैग से 15 अभ्यर्थियों की कथित गोपनीय सूची मिलने और उनमें से 10 के चयन की खबर ने परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब मामले में जांच के निष्कर्षों, आधिकारिक प्रतिक्रिया और न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और सक्षम अदालत के निर्णय के आधार पर ही होगी।

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