बिहार में 9 लाख शिक्षाकर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के वेतन पर संकट! ऑडिट रिपोर्ट के बाद जांच के आदेश

पटना: बिहार में शिक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एजी (महालेखाकार) की ऑडिट रिपोर्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख होने के बाद वेतन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए जाने की खबर है। रिपोर्ट में करीब 9 लाख शिक्षा कर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के वेतन संबंधी रिकॉर्ड का मामला उठाया गया है। हालांकि, सभी संबंधित कर्मचारियों का वेतन भुगतान रोकने के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

Oct 15, 2026 - 18:06
बिहार में 9 लाख शिक्षाकर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के वेतन पर संकट! ऑडिट रिपोर्ट के बाद जांच के आदेश

पटना: बिहार में शिक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एजी (महालेखाकार) की ऑडिट रिपोर्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख होने के बाद वेतन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए जाने की खबर है। रिपोर्ट में करीब 9 लाख शिक्षा कर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के वेतन संबंधी रिकॉर्ड का मामला उठाया गया है। हालांकि, सभी संबंधित कर्मचारियों का वेतन भुगतान रोकने के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

वित्त विभाग ने जांच के दिए निर्देश

मिली जानकारी के अनुसार, उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के बयान के हवाले से बताया गया है कि एजी की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया है। वहीं, वित्त सचिव विनय कुमार की ओर से शिक्षा और पुलिस विभाग को पत्र भेजकर वेतन संबंधी मामलों की गहन जांच करने का निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

जांच के दौरान कर्मचारियों के वेतन रिकॉर्ड, नियुक्ति संबंधी दस्तावेज और भुगतान के विवरण का मिलान किया जाएगा। इसका उद्देश्य वेतन भुगतान में संभावित गड़बड़ियों का पता लगाना और सरकारी राशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

वेतन भुगतान में अनियमितताओं के आरोप

रिपोर्ट में एचआरएमएस (HRMS) और सीएफएमएस (CFMS) पोर्टल पर वेतन से संबंधित कथित अनियमितताओं का जिक्र किया गया है। आरोप है कि कुछ मामलों में कर्मचारियों की नियुक्ति के समय ही पोर्टल पर वेतन की गलत राशि दर्ज की गई। इसके अलावा, फर्जी बिलों के जरिए भुगतान किए जाने की आशंका भी जताई गई है।

बताया गया है कि पटना सिटी स्थित फतह नारायण सिंह अकादमी स्कूल में 76.71 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। वहीं, सुपौल में 11 शिक्षकों की कथित फर्जी आईडी बनाकर 1.83 करोड़ रुपये रिश्तेदारों के खातों में हस्तांतरित किए जाने का आरोप है। इन मामलों में जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

पांच वर्षों के वेतन रिकॉर्ड की होगी जांच

वित्त विभाग के निर्देश के तहत कर्मचारियों की सैलरी स्लिप का ट्रेजरी रिकॉर्ड से मिलान किए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों के वेतन खातों और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

जांच में यदि किसी कर्मचारी, अधिकारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले जांच के निष्कर्ष और संबंधित विभाग की आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।

कर्मचारियों में बढ़ सकती है चिंता

वेतन भुगतान से जुड़ी इस खबर के बीच शिक्षा और पुलिस विभाग के कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ने की आशंका है। यदि वेतन भुगतान पर व्यापक रोक लगाई जाती है, तो इसका असर बड़ी संख्या में कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है।

फिलहाल, कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सभी संबंधित कर्मियों का वेतन वास्तव में रोक दिया गया है या केवल संदिग्ध भुगतान और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इस संबंध में संबंधित विभागों की आधिकारिक अधिसूचना या स्पष्ट बयान सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।

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