झारखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर को मिला जीआई टैग, कला और संस्कृति जगत में खुशी की लहर
रांची: झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। राज्य के पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर को आधिकारिक रूप से जीआई (GI) टैग मिलने से झारखंड के कला और संस्कृति जगत में खुशी की लहर है। गुमला समेत पूरे राज्य के लिए इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
रांची:- झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। राज्य के पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर को आधिकारिक रूप से जीआई (GI) टैग मिलने से झारखंड के कला और संस्कृति जगत में खुशी की लहर है। गुमला समेत पूरे राज्य के लिए इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मांदर को जीआई टैग दिलाने के लिए पिछले पांच वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। लंबे समय के प्रयासों के बाद मिली इस मान्यता से झारखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्र को विशिष्ट पहचान मिलने का रास्ता खुला है। मांदर राज्य की आदिवासी और लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। विभिन्न पारंपरिक त्योहारों, पर्वों और सांस्कृतिक आयोजनों में इसका विशेष महत्व है।
जीआई टैग मिलने से मांदर की पारंपरिक निर्माण शैली, शिल्प और विशिष्टता को कानूनी संरक्षण मिलने की उम्मीद है। इससे मांदर बनाने वाले स्थानीय कारीगरों को भी लाभ मिल सकता है। साथ ही, इसके बाजार का विस्तार होने और देश-विदेश में निर्यात की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह उपलब्धि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पारंपरिक कारीगरों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे आने वाली पीढ़ियों तक मांदर की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक पहचान को पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0







