झारखंड से अलग होने के 25 साल बाद बिहार में मिला 21 हजार करोड़ का खनिज खजाना, बदलेगी पुरानी कहावत?
पटना: झारखंड के अलग होने के बाद बिहार की पहचान लंबे समय तक खनिज संपदा से वंचित राज्य के तौर पर रही। इसी दौर में एक कहावत भी प्रचलित हुई- “बाढ़ बिहार को, दौलत झारखंड को।” अब बिहार में हुई नई जियोलॉजिकल जांचों ने राज्य की खनिज अर्थव्यवस्था को लेकर नई संभावनाएं पैदा की हैं।
पटना: झारखंड के अलग होने के बाद बिहार की पहचान लंबे समय तक खनिज संपदा से वंचित राज्य के तौर पर रही। इसी दौर में एक कहावत भी प्रचलित हुई- “बाढ़ बिहार को, दौलत झारखंड को।” अब बिहार में हुई नई जियोलॉजिकल जांचों ने राज्य की खनिज अर्थव्यवस्था को लेकर नई संभावनाएं पैदा की हैं।
2021 से 2024 के बीच बिहार के कई जिलों में हुई भू-वैज्ञानिक जांच में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के खनिज संसाधनों की पहचान की गई है। इनमें ग्लूकोनाइट, चूना पत्थर, मैग्नेटाइट, सोना, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, लिथियम और वैनेडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।
रोहतास में सबसे बड़ा खनिज संसाधन
रोहतास जिले के पिपराडीह-भुरवा और चुटिया-नौहट्टा ब्लॉक में करीब 130.11 मिलियन टन ग्लूकोनाइट का अनुमान लगाया गया है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 14,048 करोड़ रुपये बताई गई है। ग्लूकोनाइट से पोटाश प्राप्त किया जा सकता है, जिसका इस्तेमाल उर्वरक निर्माण में होता है।
रोहतास के ही भोरा-कठरा इलाके में करीब 33 से 39.68 मिलियन टन हाई-ग्रेड लाइमस्टोन की पहचान हुई है। इसका अनुमानित मूल्य करीब 1,761 करोड़ रुपये बताया गया है।
जमुई में सोना और मैग्नेटाइट
जमुई जिले के माजोस ब्लॉक में करीब 48.40 मिलियन टन मैग्नेटाइट संसाधन का अनुमान है। इसके अलावा भंटा ब्लॉक में भी करीब 6.49 मिलियन टन मैग्नेटाइट की पहचान हुई है।
जमुई के सोनो क्षेत्र में करीब 222.88 मिलियन टन अयस्क में 37.6 टन सोने के संसाधन का अनुमान लगाया गया है। हालांकि यह फिलहाल ‘रिसोर्स’ के रूप में वर्गीकृत है, इसे पूरी तरह प्रमाणित रिजर्व नहीं माना गया है। सरकार की योजना 2027-28 में यहां ट्रायल प्रोडक्शन शुरू करने की है।
गया और जहानाबाद में रेयर अर्थ और लिथियम
गया और जहानाबाद में हुई जांच में वैनेडियम-युक्त मैग्नेटाइट, इल्मेनाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और लिथियम-युक्त पेग्माटाइट की मौजूदगी सामने आई है।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन और रक्षा उपकरणों में होता है, जबकि लिथियम बैटरी निर्माण के लिए महत्वपूर्ण खनिज है।
केंद्र सरकार ने भी बिहार के महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया है। जुलाई 2026 में आठवें चरण की नीलामी में बिहार के तीन ब्लॉक ग्लूकोनाइट और वैनेडियम-युक्त मैग्नेटाइट-इल्मेनाइट के लिए रखे गए थे।
क्या बिहार को हर साल मिल सकते हैं 5 हजार करोड़?
बिहार के अधिकारियों के अनुमान के अनुसार यदि इन खनिज संसाधनों को सफलतापूर्वक चालू खदानों में बदला जाता है, तो राज्य को हर साल 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक का खनन राजस्व मिल सकता है। हालांकि यह संभावित राजस्व है, वर्तमान में इसे निश्चित सरकारी आय नहीं माना जा सकता।
खनन शुरू करना अभी बड़ी चुनौती
खनिज संसाधन मिलने के बाद उन्हें व्यावसायिक उत्पादन में बदलना आसान नहीं है। इसके लिए विस्तृत अन्वेषण, ड्रिलिंग, नीलामी, पर्यावरण मंजूरी, माइनिंग प्लान, लीज और निवेश जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
इसलिए 21 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा अभी भू-वैज्ञानिक आकलन पर आधारित संभावित संसाधन मूल्य है, न कि बिहार के खाते में आने वाली तत्काल राशि। बिहार सरकार 2026 से 2031 के बीच अलग-अलग खनिज परियोजनाओं को व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
अगर ये परियोजनाएं सफलतापूर्वक जमीन पर उतरती हैं, तो बिहार की खनिज अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है और राज्य की औद्योगिक गतिविधियों तथा राजस्व में बढ़ोतरी की संभावना बनेगी।
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