रामगढ़ के 237 गांवों में विकास की नई पहल, 9 हजार से अधिक ग्रामीण जरूरतों की मांगें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज

रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन को लेकर एक नई पहल की जा रही है। जिले के 237 गांवों में ग्रामीणों की प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़ी 9,000 से अधिक मांगों को डिजिटल तरीके से दर्ज किया गया है। बीवी-जी राम जी सामुदायिक योजना के तहत अब गांवों की जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों की योजना तैयार करने में इन मांगों का उपयोग किया जाएगा। ओपन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कॉमन्स कनेक्ट’ की मदद से ग्रामीणों और प्रशासन के बीच योजना निर्माण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।

Nov 1, 2026 - 14:06
रामगढ़ के 237 गांवों में विकास की नई पहल, 9 हजार से अधिक ग्रामीण जरूरतों की मांगें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज

रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन को लेकर एक नई पहल की जा रही है। जिले के 237 गांवों में ग्रामीणों की प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़ी 9,000 से अधिक मांगों को डिजिटल तरीके से दर्ज किया गया है। बीवी-जी राम जी सामुदायिक योजना के तहत अब गांवों की जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों की योजना तैयार करने में इन मांगों का उपयोग किया जाएगा। ओपन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कॉमन्स कनेक्ट’ की मदद से ग्रामीणों और प्रशासन के बीच योजना निर्माण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।

गांवों की जरूरतों के आधार पर बनेगी विकास योजना

जिला प्रशासन के अनुसार, रामगढ़ जिले के 237 गांवों में ग्रामीणों ने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़ी 9,000 से अधिक मांगें दर्ज की हैं। इनमें कुएं, सिंचाई व्यवस्था, पेड़-पौधों और जल संरक्षण जैसे कार्यों से संबंधित प्रस्ताव शामिल हैं।

हर मांग को गांव में ही दर्ज कर जियो-टैग किया गया है और युक्तधारा पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इससे गांव की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं की पहचान करने और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

युक्तधारा भारत सरकार का भू-स्थानिक पोर्टल है, जिसके माध्यम से ग्रामीण विकास और मनरेगा से जुड़ी योजनाओं की वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाई जाती है। अब बीवी-जी राम जी योजना के तहत भी इस प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है।

‘कॉमन्स कनेक्ट’ से गांवों की योजना को मिलेगा डिजिटल आधार

इस अभियान का नेतृत्व स्वयंसेवी संस्था प्रदान (PRADAN) ने किया, जिसे जिला प्रशासन का सहयोग मिला। इसमें ‘कॉमन्स कनेक्ट’ नामक ओपन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया।

यह प्लेटफॉर्म CoRE यानी Commoning for Resilience and Equity Stack पर आधारित है। इसका उद्देश्य समुदाय आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराना है।

इसकी मदद से ग्रामीण अपने इलाके की समस्याओं और जरूरतों को समझकर योजना में शामिल कर सकते हैं। ग्रामीणों को स्थानीय संसाधनों की जानकारी, संभावित विकास कार्यों और योजनाओं के बारे में समझने में सहायता मिलती है।

प्लेटफॉर्म पर पहले से उपलब्ध भू-स्थानिक नक्शों के आधार पर ग्रामीण अपने गांव की परिसंपत्तियों को चिह्नित करते हैं और उनकी जानकारी की पुष्टि करते हैं। इससे योजनाओं के चयन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ती है।

गांव-गांव जाकर दर्ज की गईं मांगें

इस अभियान में रोजगार सेवक, कनिष्ठ अभियंता, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (JSLPS) के कर्मी और पंचायत पदाधिकारियों की टीमों ने भाग लिया।

टीमों ने प्रत्येक गांव में दो दिवसीय दौरा कर ग्रामीणों के साथ सामुदायिक बैठकें कीं। बैठकों के बाद ग्रामीणों की मांगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया गया।

हर मांग के साथ कार्य का प्रकार, संबंधित ग्रामीण का विवरण, सटीक स्थान और माप से जुड़ी जानकारी दर्ज की गई। इस प्रक्रिया से योजनाओं को वास्तविक जरूरतों के आधार पर तैयार करने में मदद मिलेगी।

उपायुक्त ने बताया योजना का महत्व

रामगढ़ के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) आशीष अग्रवाल ने कहा कि ‘कॉमन्स कनेक्ट’ अपने आप में कोई योजना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और जीआईएस आधारित योजनाएं तैयार करने का माध्यम है।

उन्होंने बताया कि इस पहल से गांव की भौगोलिक स्थिति, जलधाराओं की दिशा, जल निकासी के पैटर्न और जमीन की उपयुक्तता के आधार पर सही स्थान पर विकास कार्यों का चयन किया जा सकता है।

इस तकनीक की मदद से जल संरक्षण, सिंचाई, भूमि विकास और अन्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों को बेहतर तरीके से योजनाबद्ध किया जा सकेगा।

रोजगार और पलायन रोकने की उम्मीद

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों की योजना बनने से रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। जल संरक्षण, सिंचाई और भूमि सुधार जैसे कार्यों से ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिल सकती है।

प्रशासन का मानना है कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर काम मिल सकेगा और पलायन कम करने में भी मदद मिलेगी।

रामगढ़ जिले में 9,000 से अधिक मांगों का डिजिटल संकलन ग्रामीण विकास की योजना को अधिक सहभागी, पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा ह

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