बिहार में बैंकों की नई रैंकिंग जारी, IDFC फर्स्ट बैंक टॉप पर; SBI समेत कई बड़े बैंक रेड जोन में
Bihar Bank Ranking 2026: बिहार सरकार ने राज्य में बैंकों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए 100 अंकों पर आधारित नया मापन सूचकांक लागू किया है। इस सूचकांक के आधार पर बैंकों को ग्रीन, येलो और रेड जोन में बांटा गया है। रैंकिंग में IDFC फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को 32 अंक मिले हैं और वह रेड जोन में शामिल है। बिहार सरकार ने कम प्रदर्शन करने वाले बैंकों को ऋण वितरण में तेजी लाने और वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों को मिशन मोड में पूरा करने का निर्देश दिया है।
Bihar Bank Ranking 2026: बिहार सरकार ने राज्य में बैंकों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए 100 अंकों पर आधारित नया मापन सूचकांक लागू किया है। इस सूचकांक के आधार पर बैंकों को ग्रीन, येलो और रेड जोन में बांटा गया है। रैंकिंग में IDFC फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को 32 अंक मिले हैं और वह रेड जोन में शामिल है। बिहार सरकार ने कम प्रदर्शन करने वाले बैंकों को ऋण वितरण में तेजी लाने और वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों को मिशन मोड में पूरा करने का निर्देश दिया है।
वित्त विभाग, बिहार सरकार की ओर से 24 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शुक्रवार को पटना स्थित पुराने सचिवालय के मुख्य सभाकक्ष में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की तीसरी समीक्षा बैठक हुई। बैठक में राज्य की बैंकिंग व्यवस्था, ऋण वितरण, साख जमा अनुपात और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
बिहार में पहली बार 100 अंकों के सूचकांक से बैंकों का मूल्यांकन
बिहार सरकार ने राज्य में कार्यरत बैंकों के प्रदर्शन को अधिक पारदर्शी तरीके से मापने के लिए 100 अंकों का मापन सूचकांक लागू किया है। इसके तहत विभिन्न मानकों के आधार पर बैंकों को अंक दिए गए हैं और उनके प्रदर्शन के अनुसार तीन श्रेणियों में रखा गया है।
ग्रीन जोन: 50 या उससे अधिक अंक पाने वाले बैंक।
येलो जोन: 40 से 50 अंक के बीच प्रदर्शन करने वाले बैंक।
रेड जोन: 40 से कम अंक पाने वाले बैंक।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बैंकों के प्रदर्शन की तुलना करना, ऋण वितरण की कमियों को पहचानना और राज्य की विकास योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाना है।
IDFC फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ पहले स्थान पर
सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार, ग्रीन जोन में शामिल प्रमुख बैंकों के अंक इस प्रकार हैं:
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IDFC फर्स्ट बैंक: 74 अंक
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जम्मू एंड कश्मीर बैंक: 68 अंक
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RBL बैंक: 68 अंक
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HDFC बैंक: 65 अंक
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बैंक ऑफ बड़ौदा: 64 अंक
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उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक: 63 अंक
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पंजाब एंड सिंध बैंक: 58 अंक
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बिहार ग्रामीण बैंक: 57 अंक
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बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 53 अंक
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AU स्मॉल फाइनेंस बैंक: 53 अंक
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यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: 52 अंक
इस सूची में IDFC फर्स्ट बैंक ने सबसे अधिक अंक हासिल किए हैं।
SBI समेत कई बड़े बैंक रेड जोन में
रैंकिंग में कई प्रमुख बैंक रेड जोन में शामिल हैं। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक को 32 अंक मिले हैं। इसके अलावा केनरा बैंक को 27, IDBI बैंक को 26, बंधन बैंक को 26, कोटक महिंद्रा बैंक को 26, यूको बैंक को 35 और इंडियन ओवरसीज बैंक तथा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 37-37 अंक मिले हैं।
येलो जोन में ICICI बैंक और बैंक ऑफ इंडिया को 47-47 अंक, पंजाब नेशनल बैंक को 45, एक्सिस बैंक को 42, यस बैंक को 42, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक को 42 और इंडियन बैंक को 40 अंक मिले हैं।
विकास आयुक्त ने कम प्रदर्शन करने वाले बैंकों को अपनी ऋण वितरण प्रक्रिया में सुधार करने और लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया।
बिहार के लिए 4.95 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक साख योजना
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार की वार्षिक साख योजना का लक्ष्य बढ़ाकर 4,95,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक राज्य में 1,89,343.52 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। यह वार्षिक लक्ष्य का 38.25 प्रतिशत है।
पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में ऋण वितरण में 46,228.29 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।
क्षेत्रवार प्रगति की बात करें तो:
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MSME क्षेत्र: 1,59,632 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 84,091.21 करोड़ रुपये का ऋण वितरित।
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कृषि क्षेत्र: 1,57,015 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 43,967.17 करोड़ रुपये का ऋण वितरित।
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प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र: 3,55,532 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1,30,619 करोड़ रुपये का ऋण वितरित।
सरकार का मानना है कि ऋण प्रवाह में तेजी से कृषि, छोटे उद्योगों, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
बिहार का साख जमा अनुपात 60.17 प्रतिशत
बिहार में 30 सितंबर 2026 तक साख जमा अनुपात यानी CD Ratio 60.17 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में यह अनुपात 60.21 प्रतिशत तक पहुंचा था।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल जमा राशि बढ़कर 6,49,225 करोड़ रुपये और कुल बकाया ऋण 3,90,655 करोड़ रुपये हो गया है।
पिछले वर्ष की तुलना में जमा राशि में 33,797 करोड़ रुपये और ऋण में 20,092 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
विकास आयुक्त ने कहा कि बिहार में जमा होने वाली राशि का उपयोग राज्य के कृषि, MSME, स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से उन बैंकों पर ध्यान देने को कहा, जिनका साख जमा अनुपात 50 प्रतिशत से कम है।
KCC, PM स्वनिधि और विश्वकर्मा योजना पर जोर
बैठक में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत ऋण वितरण की भी समीक्षा की गई। विकास आयुक्त ने किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने का निर्देश दिया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार:
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किसान क्रेडिट कार्ड: 7,37,906 खातों के माध्यम से किसानों को 8,344.70 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया।
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पशुपालन: 605.01 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया।
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मत्स्य पालन: 11.12 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया।
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पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: 13,911 आवेदन स्वीकृत किए गए।
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पीएम स्वनिधि योजना: 2,17,731 आवेदन स्वीकृत कर 2,099.59 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया।
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पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना: 2,748 उद्योगों को वित्तीय सहायता से जोड़ा गया।
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पीएम विश्वकर्मा योजना: 28,625 से अधिक शिल्पकारों को वित्तीय मुख्यधारा से जोड़ने की जानकारी दी गई।
सरकार ने बैंकों से इन योजनाओं के तहत लंबित आवेदनों को जल्द निपटाने और पात्र लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने को कहा है।
बैंकों को विकास आयुक्त की सख्त हिदायत
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने राज्य के औसत प्रदर्शन से पीछे रहने वाले बैंकों को ऋण वितरण में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बैंकों को मिशन मोड में काम करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ऋण आवेदनों की लंबित संख्या कम की जाए और किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम विश्वकर्मा तथा रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं से जुड़ी योजनाओं में ऋण अस्वीकृति दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जाए।
बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के मुख्य संयोजक, विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी तथा राज्य सरकार के संबंधित विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
निष्कर्ष: बिहार सरकार की नई बैंक रैंकिंग से बैंकों के प्रदर्शन की निगरानी और ऋण वितरण में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना होगा कि रेड जोन में शामिल बैंक आने वाले महीनों में अपने प्रदर्शन में कितना सुधार कर पाते हैं।
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