MMDR बिल पर झारखंड सरकार का विरोध तेज, 27 अक्टूबर को कैबिनेट में विशेष सत्र पर होगा फैसला
रांची: झारखंड में खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व और सेस वसूली के अधिकार को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। MMDR बिल को लेकर राज्य सरकार ने विरोध जताया है। इसी मुद्दे पर चर्चा और राज्य का पक्ष केंद्र के सामने रखने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी की जा रही है।
रांची: झारखंड में खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व और सेस वसूली के अधिकार को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। MMDR बिल को लेकर राज्य सरकार ने विरोध जताया है। इसी मुद्दे पर चर्चा और राज्य का पक्ष केंद्र के सामने रखने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी की जा रही है।
संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर के मुताबिक, 27 अक्टूबर को होने वाली हेमंत सोरेन कैबिनेट की बैठक में विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
MMDR बिल के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी
प्रस्तावित विशेष सत्र में MMDR बिल के संभावित प्रभावों पर चर्चा करने और इसके खिलाफ प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने की योजना है। राज्य सरकार का मानना है कि इस बिल से झारखंड के आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावित सत्र और प्रस्ताव को लेकर अंतिम फैसला कैबिनेट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।
सेस वसूली का अधिकार राज्य के पास रखने की मांग
संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर का कहना है कि खनिज संसाधनों से जुड़े सेस की वसूली का अधिकार राज्य के पास होना चाहिए। उनका तर्क है कि खनन गतिविधियों के कारण झारखंड के कई क्षेत्रों में विस्थापन और प्रदूषण जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व में राज्य के हितों की रक्षा जरूरी है।
खनिज संपदा और राज्य के आर्थिक हितों का सवाल
झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन और खनिज संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में MMDR बिल को लेकर राज्य सरकार की आपत्तियों और सेस वसूली के अधिकार का मुद्दा राजनीतिक एवं आर्थिक दृष्टि से अहम हो गया है।
अब सबकी नजर 27 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक पर है। बैठक में विशेष सत्र के प्रस्ताव पर क्या निर्णय लिया जाता है और केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष किस रूप में रखा जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा।
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