मानव संपदा पोर्टल को लेकर वित्त मंत्री सख्त, मुख्य सचिव को फिर लिखा पत्र

रांची: झारखंड सरकार के मानव संपदा पोर्टल को नहीं खोले जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस मुद्दे पर मुख्य सचिव अविनाश कुमार को एक बार फिर पत्र लिखकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कार्मिक विभाग के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी कामकाज में लालफीताशाही की मानसिकता समाप्त होनी चाहिए।

Oct 24, 2026 - 11:20
मानव संपदा पोर्टल को लेकर वित्त मंत्री सख्त, मुख्य सचिव को फिर लिखा पत्र

रांची: झारखंड सरकार के मानव संपदा पोर्टल को नहीं खोले जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस मुद्दे पर मुख्य सचिव अविनाश कुमार को एक बार फिर पत्र लिखकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कार्मिक विभाग के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी कामकाज में लालफीताशाही की मानसिकता समाप्त होनी चाहिए।

वित्त मंत्री ने शुक्रवार को लिखे पत्र में कहा कि मानव संपदा पोर्टल खोले जाने को लेकर कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो का बयान और व्यवहार ईज ऑफ गवर्नेंस के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रक्रियाओं में अनावश्यक जटिलताओं को दूर कर व्यवस्था को अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।

संपत्ति का ब्योरा जमा करने में आ रही परेशानी

वित्त मंत्री के अनुसार, कर्मचारी संघ के दो पदाधिकारियों ने उन्हें बताया कि वे अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर जमा करना चाहते हैं, लेकिन पोर्टल साल में केवल दो महीने खुलने के कारण कई कर्मचारी ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी कारणवश निर्धारित अवधि में अपनी संपत्ति का ब्योरा जमा नहीं कर पाया है और अब वह अपनी संपत्ति घोषित करना चाहता है, तो उसे इसकी सुविधा मिलनी चाहिए। वित्त मंत्री ने दावा किया कि करीब 300 कर्मचारी संपत्ति का विवरण जमा करने से वंचित रह गए हैं। संपत्ति का ब्योरा जमा नहीं होने से उनके प्रमोशन पर भी असर पड़ सकता है।

प्रशासनिक व्यवस्था को सरल बनाने पर जोर

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार सभी वर्गों को लाभ पहुंचाने और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के मामलों में भी संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है।

उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की तर्ज पर ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ गवर्नेंस को बढ़ावा देने की बात कही। उनका कहना है कि सरकारी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें कर्मचारियों और आम नागरिकों को अनावश्यक प्रक्रियात्मक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

अब इस मामले में मुख्य सचिव और कार्मिक विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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