मनोवैज्ञानिक मापनी के सांस्कृतिक अनुकूलन पर प्रो. आर.एन. सिंह ने शोधार्थियों को समझाए वैज्ञानिक मानक
बोधगया। मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग की ओर से मंगलवार को एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के मनोविज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. आर.एन. सिंह रहे। उन्होंने “शोध उपकरण/मनोवैज्ञानिक मापनी का सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक उपकरण के रूप में अनुकूलन” विषय पर विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को विस्तार से संबोधित किया।
प्रो. आर.एन. सिंह ने कहा कि मनोवैज्ञानिक शोध में किसी मानकीकृत शोध उपकरण अथवा मापनी का दूसरी भाषा या संस्कृति में सीधे प्रयोग करना हमेशा वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होता। विभिन्न संस्कृतियों में व्यक्ति के व्यवहार, भावनात्मक अभिव्यक्ति, सामाजिक मान्यताओं तथा जीवन-अनुभवों में महत्वपूर्ण अंतर पाए जाते हैं। ऐसे में किसी भी मनोवैज्ञानिक मापनी को नई सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में प्रयोग करने से पहले उसका वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक अनुकूलन आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक अनुकूलन केवल भाषा के अनुवाद तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए भाषायी समानता, सांस्कृतिक उपयुक्तता, अवधारणात्मक समानता, विश्वसनीयता और वैधता जैसे वैज्ञानिक मानकों का भी ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने शोधार्थियों को बताया कि किसी अन्य देश अथवा संस्कृति में विकसित मनोवैज्ञानिक मापनी का भारतीय संदर्भ में उपयोग करने से पहले उसकी वैज्ञानिक उपयुक्तता का परीक्षण किया जाना चाहिए।
प्रो. सिंह ने मापनी के अनुकूलन की विभिन्न प्रक्रियाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अनुवाद, पुनःअनुवाद, विशेषज्ञ मूल्यांकन, प्रारंभिक परीक्षण, विश्वसनीयता परीक्षण तथा वैधता परीक्षण की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शोध उपकरण को नई सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में अपनाते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वह जिस मनोवैज्ञानिक अवधारणा को मापने के लिए तैयार किया गया है, उसे नई संस्कृति में भी उसी अर्थ और प्रभावशीलता के साथ माप रहा है या नहीं।
उन्होंने शोधार्थियों से शोध कार्य में वैज्ञानिक पद्धति, वस्तुनिष्ठता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही, मनोवैज्ञानिक शोध उपकरणों के उपयोग में स्थानीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
विशेष व्याख्यान में विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न भी पूछे, जिनका प्रो. आर.एन. सिंह ने विस्तार से उत्तर दिया।
इस अवसर पर प्रो. सुप्रिति सुमन, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. प्रगति, डॉ. रविन्द्र सिंह एवं डॉ. प्रभात रंजन सहित विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विभाग की ओर से प्रो. आर.एन. सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया गया।