बिहार में ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों का किराया तीन गुना बढ़ा, अब हर महीने मिलेंगे ₹1,500; 38 जिलों के लिए ₹6.40 करोड़ जारी
पटना: बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए किराये के भवनों में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (APHC) के मासिक किराये में बढ़ोतरी की है। अब इन स्वास्थ्य संस्थानों को भवन किराये के लिए प्रतिमाह 1,500 रुपये मिलेंगे। पहले किराये की राशि 500 से 600 रुपये प्रतिमाह के बीच थी। स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से राज्य के ग्रामीण इलाकों में संचालित स्वास्थ्य केंद्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पटना: बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए किराये के भवनों में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (APHC) के मासिक किराये में बढ़ोतरी की है। अब इन स्वास्थ्य संस्थानों को भवन किराये के लिए प्रतिमाह 1,500 रुपये मिलेंगे। पहले किराये की राशि 500 से 600 रुपये प्रतिमाह के बीच थी। स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से राज्य के ग्रामीण इलाकों में संचालित स्वास्थ्य केंद्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
38 जिलों के लिए 6.40 करोड़ रुपये का बजट
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बिहार के सभी 38 जिलों के लिए कुल 6 करोड़ 40 लाख 80 हजार रुपये आवंटित किए गए हैं। संशोधित किराया दर को भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
इस राशि का इस्तेमाल जिला स्वास्थ्य समितियां संबंधित स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भवन किराये के भुगतान के लिए करेंगी। इससे किराये के भवनों में चल रहे स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन में आर्थिक परेशानी कम होने की उम्मीद है।
लंबे समय से किराया बढ़ाने की थी जरूरत
ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्वास्थ्य उपकेंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किराये के भवनों में संचालित होते हैं। लंबे समय से किराये की राशि में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं होने के कारण भवन मालिकों को भुगतान और संस्थानों के संचालन से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही थीं। ऐसे में किराये की राशि बढ़ाने के फैसले को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है।
हर महीने समय पर करना होगा किराये का भुगतान
स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भवन मालिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हर महीने समय पर किराये का भुगतान किया जाए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को नियमानुसार बिल तैयार कर महीने के अंतिम दिन तक खर्च की रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य समिति को भेजनी होगी।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पर्याप्त बजट उपलब्ध रहने के बावजूद किराये का भुगतान करने में देरी होने पर संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इसकी रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भी भेजी जाएगी।
ग्रामीणों को मिल सकती है बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
सरकार को उम्मीद है कि किराये की राशि बढ़ने और भुगतान व्यवस्था को नियमित करने से ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों का संचालन सुचारु होगा। इससे गांवों में रहने वाले लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार भवनों की उपलब्धता, चिकित्सा कर्मियों की तैनाती, दवाओं और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा।
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