भारत सेवाश्रम संघ में सनातन हिन्दू धर्म-शिक्षा संस्कृति सम्मेलन आयोजित
भारतीय शिक्षा संस्कृति का आदर्श’ विषय पर प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र ने रखे विचार
गयाजी। पितृपक्ष के पावन अवसर पर भारत सेवाश्रम संघ, गयाजी के परिसर में गुरुवार, 8 अक्टूबर को सनातन हिन्दू धर्म-शिक्षा संस्कृति सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में ‘भारतीय शिक्षा संस्कृति का आदर्श’ विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रधान अतिथि के रूप में गया कॉलेज, गया के प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र की गरिमामय उपस्थिति रही। उन्होंने भारतीय शिक्षा एवं संस्कृति की परंपरा, उसके आदर्शों तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र ने गयाजी और गयासुर के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व की चर्चा करते हुए इसके ऐतिहासिक एवं पौराणिक संदर्भों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि गयाजी सनातन धर्म की आस्था का प्रमुख केंद्र है और पितृपक्ष के दौरान यहां होने वाला पिंडदान एवं श्राद्ध कर्म पूर्वजों की मोक्ष-कामना से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। उन्होंने पिंडदान के महत्व और इसकी सनातन परंपरा पर भी विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. मार्कण्डेय पाण्डेय, सहायक प्राध्यापक, गया कॉलेज, गया सहित अनेक साधु-संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सम्मेलन में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धार्मिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
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