वैज्ञानिक तरीकों से मत्स्य उत्पादन मछुआरों की समृद्धि में सहायक : अमरेंद्र कुमार
झारखंड के जलाशयों में मत्स्य शिकार तकनीकों का सर्वेक्षण संपन्न।
झारखंड राज्य के प्रमुख जलाशयों में मत्स्य शिकार की वर्तमान स्थिति, मछुआरों द्वारा उपयोग की जा रही पारंपरिक मछली पकड़ने की तकनीकों तथा भविष्य में उन्नत मत्स्य प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं के आकलन हेतु 26 से 28 मई, 2026 तक झारखंड के प्रमुख जलाशयों का क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया गया। यह सर्वेक्षण डॉ.श्रवण कुमार शर्मा, वैज्ञानिक, (भाकृअनुप) केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई अनुसंधान केंद्र द्वारा किया गया।
सर्वेक्षण के अंतर्गत गेतलसूद, तेनुघाट, कांके, हटिया, मैथन एवं पंचेत जलाशयों का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान जलाशयों में उपलब्ध मत्स्य संसाधनों, मछली पकड़ने की वर्तमान पद्धतियों, उपयोग किए जा रहे मत्स्य जालों, नावों, मत्स्य शिकार की चुनौतियों तथा स्थानीय मछुआरों की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं का अध्ययन किया गया। विभिन्न स्थलों पर मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों तथा स्थानीय हितधारकों से चर्चा कर जलाशय आधारित मत्स्यिकी की व्यावहारिक समस्याओं और संभावित तकनीकी समाधानों की जानकारी प्राप्त की गई।
झारखंड के जलाशयों में मत्स्य उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं
सर्वेक्षण में यह पाया गया कि झारखंड के जलाशयों में मत्स्य उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं उपलब्ध हैं, परंतु उन्नत एवं वैज्ञानिक मत्स्य शिकार तकनीकों, उपयुक्त मत्स्य जालों, सुरक्षित एवं ऊर्जा दक्ष नावों तथा आधुनिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जलाशयों की भौगोलिक स्थिति, जल की गहराई और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्र विशेष के अनुरूप मत्स्य शिकार तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता महसूस की गई।
सर्वेक्षण के आधार पर झारखंड के मछुआरों के लिए उन्नत एवं आधुनिक मत्स्य प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने की योजना बनाई जाएगी। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक तरीके से मछली पकड़ने की तकनीक, बेहतर एवं चयनात्मक मत्स्य जालों का उपयोग, जलाशय मत्स्यिकी के लिए उपयुक्त नावों का संचालन, ऊर्जा दक्ष तथा पर्यावरण अनुकूल विद्युत एवं सौर ऊर्जा आधारित मछली पकड़ने वाली नावों की जानकारी, मछली पकड़ने के दौरान सुरक्षा उपाय तथा मत्स्य संसाधनों के सतत उपयोग पर विशेष बल दिया जाएगा।
भविष्य में झारखंड के चयनित जलाशयों में उन्नत मत्स्य जालों, आधुनिक मत्स्य शिकार तकनीकों तथा विद्युत एवं सौर ऊर्जा आधारित मछली पकड़ने वाली नावों के प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य मछुआरों की आय में वृद्धि, ईंधन खर्च में कमी, मत्स्य शिकार की दक्षता में सुधार तथा जलाशय मत्स्यिकी को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाना है।
इस संबंध में अमरेन्द्र कुमार, (निदेशक मत्स्य) ने बताया कि झारखंड के जलाशयों में वैज्ञानिक तरीकों, उपयुक्त प्रशिक्षण और उन्नत मत्स्य उपकरणों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन एवं मछुआरों की आजीविका में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भा.कृ.अनु.प -केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा बेहतर मत्स्य प्रौद्योगिकियों के प्रसार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जाएगा।
झारखंड में मत्स्य उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं : डॉ.श्रवण कुमार शर्मा
डा. श्रवण शर्मा ने बताया कि यह सर्वेक्षण झारखंड राज्य में जलाशय आधारित मत्स्यिकी के विकास, मछुआरों की क्षमता निर्माण तथा स्वच्छ, ऊर्जा दक्ष और टिकाऊ मत्स्य शिकार प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। इसके लिए निदेशक आईसीएआर-सीआईएफटी को धन्यवाद दिया।
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