हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानियों ने गिरफ्तारियां देकर इतिहास रच दिया था

(8 अगस्त, 'भारत छोड़ो आंदोलन' प्रस्ताव के  पारित होने  के 84 वें वर्ष  में प्रवेश पर  विशेष)

Aug 7, 2026 - 14:55
हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानियों ने गिरफ्तारियां देकर इतिहास रच दिया था

8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी द्वारा लिए गए  'भारत छोड़ो आंदोलन' के प्रस्ताव ने  संपूर्ण देश के स्वाधीनता सेनानियों में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया था । अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी की मुंबई में हुई इस बैठक का प्रस्ताव देश भर में आग की चिंगारी की तरह फैल गया था। इस प्रस्ताव के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गिरफ्तार किया जाने लगा था। वहीं हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानियों ने अपनी - अपनी गिरफ्तारियां देकर देश भर में एक नया इतिहास रचने का काम किया था।

हजारीबाग के सेंट्रल जेल का प्रभाव 

एक आंकड़े के अनुसार देश भर के सभी जिलों की तुलना में हजारीबाग के रण बांकुरों ने सबसे ज़्यादा संख्या में अपनी - अपनी गिरफ्तारियां दी थीं।‌ जिसकी चर्चा अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच भी होती रहती थी । चूंकि हजारीबाग में सेंट्रल जेल होने के कारण देश भर के  बड़े स्वाधीनता सेनानीयों को इस जेल में बंद किया गया था, इसका भी असर हजारीबाग में बढ़ते स्वाधीनता आंदोलन पर पड़ा था । 

जेल में बंद नेताओं के गुप्त पत्रों को मंजिल तक पहुँचाते थे 

इन नेताओं के हजारीबाग के सेंट्रल जेल में बंद होने के कारण इसकी चर्चा बराबर हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानियों में होती रहती थी। इन खबरों से  हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानी स्वस्फूर्त जागृत होते चले जा रहे थे। भारत छोड़ो आंदोलन प्रस्ताव के पारित होने के बाद हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानी ब्रिटिश हुकूमत के नंबर वन टारगेट में रहे थे । भारत छोड़ो आंदोलन प्रस्ताव के पारित होने के पूर्व ही  सेंट्रल जेल में बंद नेताओं के आंदोलन से संबंधित गुप्त पत्रों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में  हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानियों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इस बात की खबर ब्रिटिश हुकूमत के जिला स्तर के अधिकारियों को थी। हजारीबाग जिले के डिप्टी कमिश्नर  के कड़े पाबंदी के बावजूद हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानी अपने मिशन में सफल होते रहे थे।

वंदे मातरम् और भारत माता की जय बोलते गिरफ्तारियां दी 

8 अगस्त को मुंबई में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ था । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस बैठक में करो या मरो का नारा भी दिया था। यह खबर जैसे ही हजारीबाग पहुंची थी, हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानी अगली बैठक की तैयारी में जुट गए थे। 9 अगस्त को हजारीबाग में सबसे पहली गिरफ्तारी बाबू राम नारायण सिंह की हुई थी। बाबू राम नारायण सिंह हजारीबाग स्थित रामनगर के अपने आवास पर बैठकर अगली रणनीति पर विचार कर रहे थे । तभी सुबह-सुबह जिला के पुलिस अधिकारी दलबल समेत उनके आवास पर आए। वे घर के बाहर के कमरे में ही बैठे हुए थे। उन्हें इस बात की जानकारी थी कि भारत छोड़ो आंदोलन के प्रस्ताव पारित होने के बाद  उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा । वे चाहते तो गिरफ्तारी से बचने के लिए  अपने घर के पीछे के रास्ते से भाग सकते थे ।लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।  उन्होंने वंदे मातरम, भारत माता की जय का नारा देते हुए अपनी सहर्ष गिरफ्तारी दे दी थी । उन्हें हजारीबाग के सेंट्रल जेल में बंद किया गया था।

सरस्वती देवी की गिरफ्तारी राष्ट्रीय चर्चा बनी 

झारखंड प्रांत के हजारीबाग जिले की पहली महिला स्वाधीनता सेनानी सरस्वती देवी को 10 अगस्त को हजारीबाग जिला पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सरस्वती देवी अपने अन्य स्वाधीनता सेनानियों के साथ एक गुप्त सभा में शामिल होने जा रही थी। इस बात की सूचना हजारीबाग पुलिस को मिल गई थी। हजारीबाग पुलिस ने उन्हें बीच मार्ग पर  ही गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें भी हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंद कर दिया था। सरस्वती देवी ने सहर्ष अपनी गिरफ्तारी दी थी। उनके चेहरे पर इस गिरफ्तारी का कोई भी भय नहीं था। सरस्वती देवी जैसे ही गिरफ्तार हुई, यह खबर हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानियों के बीच आग की चिंगारी की तरह पहुंच गई थी। सरस्वती देवी की गिरफ्तारी पर हजारीबाग के स्वाधीनता सेनानियों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्ति थी कि एक महिला स्वाधीनता सेनानी से ब्रिटिश हुकूमत पूरी हिल सी गई, इसलिए उन्हें एक महिला स्वाधीनता सेनानी को भी गिरफ्तार करने के लिए बाध्य होना पड़ा । इस बात का देशभर की महिलाओं पर बहुत ही अनुकूल असर पड़ा था। उस कालखंड में सरस्वती देवी की गिरफ्तारी एक राष्ट्रीय खबर बन गई थी। सरस्वती देवी इस गिरफ्तारी के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के  राष्ट्रीय नेताओं के बीच चर्चित हो गई थीं। सरस्वती देवी का भाषण और स्वाधीनता आंदोलन के प्रति उनका समर्पण आज भी देशभर की महिलाओं का मार्ग प्रशस्त करता रह रहा है।

अधिवेशन से वापस लौटते समय कृष्ण बल्लभ सहाय की गिरफ्तारी हुई 

अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के कार्यकारणी के सदस्य कृष्ण बल्लभ सहाय को 11 अगस्त को गोमिया  स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया था।‌ वे मुंबई से अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन से वापस हजारीबाग लौट रहे थे।‌ उन्होंने इस ऐतिहासिक अधिवेशन में खुद को शामिल कर हजारीबाग को सदा सदा के लिए गौरवान्वित कर दिया था। उन्हें भी आशंका थी कि ब्रिटिश हुकूमत गिरफ्तार कर लेगी। लेकिन उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि बीच रास्ते में ही इस तरह उनकी गिरफ्तारी हो जाएगी।‌ इससे प्रतीत होता है कि स्वाधीनता आंदोलन में राष्ट्रीय स्तर पर कृष्ण बल्लभ सहाय का कैसा असर था। उन्होंने पुलिस अधिकारी को हजारीबाग से अपने आवास पर से गिरफ्तार करने की बात कही थी। लेकिन पुलिस अधिकारी ने उनकी बात को बिल्कुल नहीं माना । तब उन्होंने भी अपनी सहर्ष गिरफ्तारी दे दी थी। वे इस गिरफ्तारी से बिल्कुल विचलित नहीं हुए थे। उन्हें भी हजारीबाग  के सेंट्रल जेल में बंद किया गया था।

सुखलाल सिंह के आदर्श थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

बाबू राम नारायण सिंह के छोटे भाई सुखलाल सिंह को चतरा (तब  हजारीबाग जिला के अंतर्गत ही था) से उनके आवास से पर से पुलिस ने  उन्हें गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल  जेल भेज दिया था। सुखलाल सिंह एक बड़े क्रांतिकारी थे। वे स्वाधीनता आंदोलन को पूरे हजारीबाग जिले में जन-जन तक  पहुंचाने महत्वपूर्ण भूमिका अदा किए थे । वे अपने बड़े भाई बाबूराम नारायण सिंह के पद चिन्हों पर चलते हुए स्वाधीनता आंदोलन में पूरी तरह स्वयं को झोंक दिए थे। वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्य अहिंसा के आदर्श पर आजीवन चलते रहे थे। देश की आजादी के बाद वे चाहते तो चुनाव लड़कर विधायक और सांसद बन सकते थे।  लेकिन उन्होंने समाज सेवा को ही अपना आदर्श माना। वे कांग्रेस पार्टी के एक कर्मठ सिपाही के रूप में सदा अपने बड़े भाई बाबूराम नारायण सिंह के साथ जुड़े रहे थे।‌ जब बाबूराम नारायण सिंह ने अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, तब सुखलाल सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया था। बाकी का शेष जीवन उन्होंने आनंद पूर्वक खेती किसानी को दे दिया था।

मदनलाल और अग्रवाल बंधुओं ने आजादी की अलख जगाई 

उपरोक्त स्वाधीनता सेनानियों सहित हजारीबाग के मदन लाल शर्मा को उनके हजारीबाग बाडम बाजार स्थित आवास से पुलिस गिरफ्तार कर हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंद कर दिया था।  मदनलाल शर्मा एक व्यवसायी होते हुए भी देश की आजादी तक स्वाधीनता आंदोलन का अलख जगाते रहे थे। वे देश की आजादी के बाद  एक व्यावसायिक रूप में ही शेष जीवन को गुजारे थे। हजारीबाग के मेन रोड निवासी कस्तूरमल अग्रवाल और शिवलाल अग्रवाल दोनों भाई को उनके निवास स्थान से गिरफ्तार कर हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया था। दोनों भाई व्यवसायी थे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर दोनों भाई स्वाधीनता आंदोलन में कूदे थे। वे दोनों जीवन के अंतिम क्षणों तक अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे थे। देश की आजादी के बाद उन दोनों ने किसी भी तरह  कोई सरकारी पेंशन नहीं लिया था। दोनों भाई आजीवन समाज सेवा से जुड़े रहे थे।

गांधी जी आह्वान पर सैकड़ों सेनानी स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े 

वर्तमान चतरा जिले  के शालिग्राम सिंह, अनुग्रह नारायण सिन्हा,भानु प्रताप सिंह, नागेश्वर सिंह, त्रिवेणी सहाय,रामदेव तिवारी आदि को हजारीबाग पुलिस गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल में बंद कर दी थी। वे सभी इस गिरफ्तारी से डर कर कहीं भागे नहीं बल्कि सबों ने पुलिस को सहर्ष अपनी-अपनी गिरफ्तारी दी थी। ये सभी आंदोलनकारी महात्मा गांधी के आह्वान पर स्वाधीनता आंदोलन में कूदे थे। हजारीबाग नगर के शिवकुमार और रामानंद जी की गिरफ्तारी स्वाधीनता आंदोलन का प्रचार करते हुए हुई थी । इन दोनों को भी हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंदी बनाया गया था।  ये दोनों भी महात्मा गांधी के आह्वान पर स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े थे। ये दोनों आजीवन कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे थे।  इन दोनों ने भी देश की आजादी के बाद कोई पेंशन नहीं लिया था। हजारीबाग जिला अंतर्गत बड़कागांव कस्बे से आनंदी साव, केदार सिंह,सुधीर मलिक, सीताराम अग्रवाल, चैत लाल तेली, रामदयाल साव और कांशीराम मुंडा को हजारीबाग पुलिस ने उन सबों के उनके आवास से गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल में बंदी बना दी थी। वे सभी महात्मा गांधी के आह्वान पर  स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े थे। ये सभी खेती किसानी से जुड़े थे। इन सभी स्वाधीनता सेनानियों ने भी देश की आजादी के बाद कोई पेंशन नहीं लिए थे बल्कि एक कृषक के रूप में अपना से शेष जीवन बीताए थे।


    

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