संसद में हंगामे के बीच सरकार का मिशन जारी, बिना चर्चा कई बिल पास; अब FCRA संशोधन विधेयक पर नजर
NEW DELHI : संसद के मॉनसून सत्र के लगातार 12वें दिन हंगामा होता रहा. विपक्ष अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है. दोनों ही सदनों में विपक्ष के विरोध के कारण प्रश्न काल और शून्यकाल बाधित हो रहे हैं. इस बीच, सरकार ने हंगामे के बात ही विधेयक पारित कराने की अपनी रणनीति को अमल में लाना शुरू कर दिया है.
विपक्ष के हंगामे के बीच ही सरकार अपना विधायी कार्य निपटा रही है. दोनों सदनों में सरकार बिलों को एक-एक कर पारित करा रही है. अधिकांश बिल बिना चर्चा के ही पारित हो रहे हैं. एक बिल पर जहां विपक्ष ने समर्थन किया, वहीं एक अन्य बिल पर विपक्ष के अधिकांश दलों ने वॉकआउट कर सरकार का काम आसान कर दिया.
पांच बिल लोकसभा में पारित
अभी तक सरकार हंगामे और विरोध के बीच ही लोक सभा में पांच बिल पारित करवा चुकी है. इनमें एंटी पेपर लीक बिल पर विपक्ष ने साथ दिया. वहीं वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण देने वाले बिल पर डीएमके को छोड़ कर अधिकांश विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया.
आज हंगामे के बीच ही एप्रोप्रिएशन बिल पारित करा लिया गया. इस पर कोई चर्चा ही नहीं हुई. सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने, जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के संशोधन विधेयक को भी हंगामे और शोर-शराबे के बीच पारित कराया गया.
राज्यसभा में भी यही हाल
राज्य सभा में भी यही स्थिति बनी हुई है. वहां भी विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी और जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के विरोध में विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है. इसके बावजूद सरकार का विधायी कार्य नहीं रुका है. यहां विपक्षी एंटी पेपर लीक बिल पारित कराने में सरकार को सहयोग दिया. जबकि एमएसएमई बिल भी पारित करा लिया गया है.
अब सरकार के एजेंडे में एक महत्वपूर्ण बिल बचा है. यह है एफसीआरए संशोधन बिल. हालांकि सोमवार को लोक सभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इसे एजेंडे में नहीं लिया गया. लेकिन सरकार के सूत्रों ने कहा है कि संभवतः इसी हफ्ते या अगले सप्ताह इस बिल को लाया जाएगा.
स्वयं गृह मंत्री अमित शाह इस बिल पर चर्चा का जवाब देंगे. हालांकि सरकार के महत्वाकांक्षी परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन विधेयक पर अभी सस्पेंस बना हुआ है. सरकारी सूत्रों के अनुसार यह बिल तभी लाया जाएगा जब सरकार इसके पारित होने को लेकर आश्वस्त हो.
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