शब्दवीणा की मासिक साहित्यिक भेंटवार्ता "एक शाम साहित्य के नाम" के सितंबर अंक का हुआ आयोजन, आमंत्रित कवयित्री जया शर्मा प्रियंवदा ने युवाओं को सद्साहित्य पढ़ने की सलाह दी

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'शब्दवीणा' की हरियाणा प्रदेश समिति एवं फरीदाबाद जिला समिति द्वारा हर माह नियमित रूप से आयोजित होने वाली भेंटवार्ता "एक शाम साहित्य के नाम" के सितंबर माह के अंक में आमंत्रित साहित्यकार के रूप में कवयित्री जया शर्मा प्रियंवदा ने अपनी पारिवारिक साहित्यिक पृष्ठभूमि एवं जन्मस्थली शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश से जुड़ी मधुर स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने अपने ऊपर गुड़गांव, हरियाणा के गांधी फैजाम डिग्री कॉलेज में हिंदी प्रोफेसर के रूप में कार्यरत अपने साहित्यकार पिता डॉ. नित्यानंद मुद्गल के प्रभावों की चर्चा करते हुए बताया कि उनके घर पर नागार्जुन, कमलेश्वर, विष्णु प्रभाकर जैसे महान लेखकों का आना-जाना लगा रहता था। शैक्षणिक एवं साहित्यिक परिवेश में पले-बढ़े होने की वजह से उनके अंदर भी साहित्य सृजन के अंकुर आसानी से फूट सके। कार्यक्रम का संयोजन शब्दवीणा हरियाणा प्रदेश सचिव एवं फरीदाबाद जिला समिति की संरक्षक कवयित्री सरोज कुमार ने, तथा समन्वयन शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। कार्यक्रम का संचालन वार्ताकार के रूप में 'एक शाम साहित्य के नाम' की प्रभारी रिया अग्रवाल ने किया। उन्होंने श्रीमती प्रियंवदा से संस्कृति, संस्कार, समाज ए्वं साहित्य सेवा पर बातचीत करते हुए विभिन्न रोचक प्रश्न पूछे। श्रीमती प्रियंवदा ने भेंटवार्ता के दरम्यान शब्दवीणा के कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए "एक शाम साहित्य के नाम" में आमंत्रित किए जाने पर हार्दिक प्रसन्नता जताई। उन्होंने युवाओं को सद्साहित्य पढ़ने का संदेश दिया। बच्चों को प्रेमचंद की कहानियाँ एवं उपन्यास पढ़ने की सलाह दी। कहा कि युवाओं को लाइब्रेरी जाकर अच्छी पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। श्रीमती प्रियंवदा ने अपने स्वरचित कहानी संग्रह 'मनकही' एवं 'मेरे हिस्से का आसमान' पर बातचीत की। सृजनात्मक लेखन में अभिधा, लक्षणा एवं व्यंजना शब्दशक्तियों की समझ पर भी विचार-विमर्श हुआ। श्रीमती प्रियंवदा ने अपनी रचनाएँ भी प्रस्तुत कीं। अपनी रचना "जंगल के पेड़ शोर नहीं मचाते हैं। वे तो आपस मे बतियाते हैं। वे तो हमें अपने पास बुलाने के लिए आवाज़ दे-देकर मनुहार लगाते हैं" सुनाते हुए श्रीमती प्रियंवदा ने जंगल का पेड़ बन जाने की इच्छा प्रकट की। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा के केन्द्रीय फेसबुक पेज से किया गया। महावीर सिंह वीर, डॉ विजय शंकर, सुरेश विद्यार्थी, प्यारचंद कुमार मोहन, पुरुषोत्तम तिवारी, अरुण अपेक्षित, ललित शंकर, सरोज कुमार, अजय कुमार, जैनेंद्र कुमार मालवीय, मीरा परिहार, डॉ रविशंकर राकेश, मधु वशिष्ठ, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, जनार्दन प्रसाद मिश्र, पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव एवं डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी के साथ विभिन्न प्रदेशों से जुड़े साहित्यानुरागियों ने भेंटवार्ता का लाभ उठाया।

Sep 20, 2026 - 18:29
शब्दवीणा की मासिक साहित्यिक भेंटवार्ता "एक शाम साहित्य के नाम" के सितंबर अंक का हुआ आयोजन, आमंत्रित कवयित्री जया शर्मा प्रियंवदा ने युवाओं को सद्साहित्य पढ़ने की सलाह दी

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