दहेज के लिए पत्नी और एक साल के बेटे को जिंदा जलाने का मामला, पति को उम्रकैद; तीन अन्य दोषियों को 3 साल की सजा
मधेपुरा: दहेज के लिए पत्नी और एक वर्षीय मासूम बेटे को जिंदा जलाकर हत्या करने के करीब डेढ़ दशक पुराने मामले में मधेपुरा व्यवहार न्यायालय ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। एडीजे-3 रघुवीर प्रसाद की अदालत ने दोषी पति रूपेश मेहता को भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 304ए के तहत भी 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर छह माह के साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है।
मामले में अन्य आरोपी महानंद मेहता, मनोज मेहता और प्रदीप मेहता को भी अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
मामला वर्ष 2010 में मधेपुरा जिले के श्रीनगर थाना में दर्ज किया गया था। मृतका कारी देवी के पिता सत्यनारायण मेहता ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि उनकी बेटी की शादी वर्ष 2005 में रूपेश मेहता के साथ हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों में दांपत्य जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में दहेज में विभिन्न सामान की मांग को लेकर कारी देवी को कथित तौर पर प्रताड़ित किया जाने लगा।
आरोप के अनुसार, दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर मामला गंभीर होता गया और कारी देवी पर किरासन तेल डालकर आग लगा दी गई। आरोप है कि महिला की मौत के बाद उसके शव को जलाया गया और उसी चिता पर उसके एक वर्षीय पुत्र को भी जला दिया गया।
इस मामले में पूर्व में तीन आरोपियों को सजा सुनाई जा चुकी है। शुक्रवार को अदालत ने पति रूपेश मेहता समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ सजा सुनाई। लंबे समय से चल रहे इस मामले में फैसला आने के बाद मृतका के परिजनों को न्याय की उम्मीद मजबूत हुई है।
अपर लोक अभियोजक रमेश मेहता ने बताया कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की सुनवाई के बाद दोषियों को सजा सुनाई है। उन्होंने कहा कि दहेज हत्या जैसे गंभीर मामले में न्यायालय द्वारा कठोर सजा दिया जाना महत्वपूर्ण है।
लोकेशन: मधेपुरा, बिहार
रिपोर्टर: राजीव रंजन
बाइट: रमेश मेहता, अपर लोक अभियोजक
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