ओत् गुरु कोल लाको बोदरा की जयंती पर श्रद्धांजलि, हो भाषा और वारंग क्षिति लिपि में योगदान को किया याद
रांची। आदिवासी हो भाषा एवं वारंग क्षिति लिपि के जनक, महान साहित्यकार और समाज सुधारक ओत् गुरु कोल लाको बोदरा की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
रांची:- आदिवासी हो भाषा एवं वारंग क्षिति लिपि के जनक, महान साहित्यकार और समाज सुधारक ओत् गुरु कोल लाको बोदरा की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
इस अवसर पर उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा गया कि उन्होंने हो भाषा और वारंग क्षिति लिपि के माध्यम से आदिवासी समाज की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ओत् गुरु लाको बोदरा ने भाषा और लिपि को समाज की पहचान, संस्कृति, परंपराओं और पुरखों की विरासत को संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया। उनके प्रयासों ने हो भाषा को लिखित स्वरूप में आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया।
जयंती के अवसर पर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प दोहराया गया। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने पर जोर दिया गया।
ओत् गुरु कोल लाको बोदरा की विरासत आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी भाषा और संस्कृति के प्रति योगदान को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
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