एआई के दौर में बदलेगी कार्यसंस्कृति, मानवीय नेतृत्व रहेगा अहम, आईआईएम बोधगया में ‘ज्ञानोदय 6.0’ सम्मेलन, प्रतिभा, नेतृत्व और प्रदर्शन पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
बोधगया। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बोधगया में वार्षिक प्रबंधन सम्मेलन ‘ज्ञानोदय 6.0’ का आयोजन किया गया। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “कार्य की नई परिकल्पना : एआई संचालित दुनिया में प्रतिभा, नेतृत्व और प्रदर्शन” रहा। सम्मेलन में उद्योग, मानव संसाधन और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने एआई के बढ़ते प्रभाव और बदलते कार्यक्षेत्र पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम में चार पैनल चर्चाएं हुईं, जिनमें एआई के उभरते रुझान, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रतिभा एवं नेतृत्व से जुड़े निर्णयों में मानवीय भूमिका और समावेशी नेतृत्व पर चर्चा हुई। आईआईएम बोधगया की निदेशक डॉ. विनिता एस. सहाय ने कहा कि ज्ञान, सीखने और विकास के लिए अनुशासन, निरंतरता और प्रतिबद्धता जरूरी है। उन्होंने कहा कि लगातार सीखने और क्षमताओं को विकसित करने से व्यक्ति और संगठन भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होते हैं।
उद्घाटन सत्र में सरिता रामनाथ, अलका पांडेय और शिवेश सिंह ने नेतृत्व एवं एआई के संबंध पर विचार रखे। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल एआई का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बेहतर नेतृत्व के लिए आलोचनात्मक सोच, निर्णय क्षमता, सहानुभूति, साहस और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति भी जरूरी है।
दूसरे सत्र में रोजगार के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ संचार कौशल, रचनात्मक सोच, टीम भावना और समस्या समाधान क्षमता को महत्वपूर्ण बताया गया। तीसरे और समापन सत्र में एआई, डिजिटल परिवर्तन, डेटा आधारित निर्णय और मानवीय निर्णय क्षमता पर चर्चा हुई।
अंत में डॉ. मोल्ला रामिज़ुर रहमान ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सम्मेलन में तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों और नेतृत्व क्षमता के महत्व को रेखांकित किया गया।