ग्रामीण परिवर्तन के जमीनी शिल्पकार बने CRPs, करोड़ों ग्रामीणों तक पहुंच रही आजीविका और वित्तीय सेवाएं
नई दिल्ली। ग्रामीण भारत में समुदाय आधारित कार्यकर्ताओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। देशभर में 9 लाख से अधिक कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRPs) ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम छोर तक विभिन्न सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में योगदान दे रहे हैं।
नई दिल्ली:- ग्रामीण भारत में समुदाय आधारित कार्यकर्ताओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। देशभर में 9 लाख से अधिक कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRPs) ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम छोर तक विभिन्न सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में योगदान दे रहे हैं।
इनमें 4.08 लाख आजीविका CRPs कृषि, पशुधन, मत्स्यपालन और ग्रामीण उद्यमों से जुड़े लोगों को सहयोग दे रहे हैं। वहीं 4.62 करोड़ से अधिक महिला किसान कृषि आजीविका से जुड़े हस्तक्षेपों से जुड़ी हैं। जून 2025 तक इन्हें 3 लाख से अधिक आजीविका CRPs का सहयोग मिला।
वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति हुई है। 2025-26 के दौरान 3.81 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण दिया गया।
स्वास्थ्य और पोषण के मोर्चे पर 10.40 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता और 10.58 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्वास्थ्य, पोषण तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इन सामुदायिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं, आजीविका के अवसरों और जरूरी सेवाओं की पहुंच को जमीनी स्तर तक मजबूत किया जा रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0

