विकसित भारत के लिए पिछड़े राज्यों को मिले विशेष सहयोग: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, केंद्र के सामने रखीं 3 प्रमुख मांगें
नई दिल्ली: भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन ‘विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण’ में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के आर्थिक हितों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग देना जरूरी है।
नई दिल्ली: भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन ‘विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण’ में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के आर्थिक हितों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग देना जरूरी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि विकास का आकलन केवल GDP, प्रति व्यक्ति आय और विनिर्माण उत्पादन से नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति के आधार पर भी होना चाहिए। उन्होंने कृषि, सिंचाई, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई।
झारखंड के संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि केंद्र की नीतियों के कारण राज्य को करीब 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये की संभावित आर्थिक क्षति हो रही है। उन्होंने खनिज क्षेत्र से जुड़े बदलावों और कर नीतियों के प्रभाव का भी उल्लेख किया।
वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं—खनन पर सेस लगाने का अधिकार पुनर्बहाल करना, GST से हुई क्षति की भरपाई करना और जी-राम-जी योजना में 90:10 का अनुपात बहाल करना। उन्होंने कहा कि राज्यों को मजबूत किए बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं होगा।
सम्मेलन में झारखंड के वित्त सचिव प्रशांत कुमार समेत विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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