तिरहुत स्नातक चुनाव में हार के बाद अभिषेक झा का बड़ा दावा, 4700 वोट रद्द होने पर उठाए सवाल; NDA के भीतर चक्रव्यूह में फंसने की कही बात

मुजफ्फरपुर/पटना: तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जदयू के प्रत्याशी रहे अभिषेक झा ने अपनी हार के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए समर्थकों और मतदाताओं का आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने करीब 4700 मतों के निरस्त होने का दावा कर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अपने बयान में उन्होंने एनडीए के भीतर राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए खुद की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से भी की। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर ब्रजवासी ने जीत दर्ज की है।

Oct 30, 2026 - 16:34
तिरहुत स्नातक चुनाव में हार के बाद अभिषेक झा का बड़ा दावा, 4700 वोट रद्द होने पर उठाए सवाल; NDA के भीतर चक्रव्यूह में फंसने की कही बात

मुजफ्फरपुर/पटना: तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जदयू के प्रत्याशी रहे अभिषेक झा ने अपनी हार के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए समर्थकों और मतदाताओं का आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने करीब 4700 मतों के निरस्त होने का दावा कर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अपने बयान में उन्होंने एनडीए के भीतर राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए खुद की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से भी की। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर ब्रजवासी ने जीत दर्ज की है।

4700 वोट रद्द होने के दावे से उठाए सवाल

अभिषेक झा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि करीब 4700 मतों को अमान्य घोषित कर दिया गया। उनके अनुसार, इन मतपत्रों पर उनके नाम के सामने टिक का निशान होने के कारण वोट निरस्त किए गए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इन मतों को अमान्य नहीं किया जाता, तो चुनाव का परिणाम अलग हो सकता था। हालांकि, उनके इस दावे और मतों की वैधता से जुड़े विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

अभिषेक झा ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए मतगणना और मतों को निरस्त किए जाने के कारणों पर सवाल उठाए। उनके बयान के बाद चुनाव परिणाम और अमान्य मतों को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।

NDA के भीतर चक्रव्यूह में फंसने का किया जिक्र

चुनाव में हार के बाद अभिषेक झा ने अपने बयान में एनडीए के भीतर की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी संकेत दिए। उन्होंने अपनी स्थिति की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से करते हुए सवाल उठाया कि क्या वह अपने ही राजनीतिक परिवार के भीतर बने चक्रव्यूह में अकेले पड़ गए थे।

उनके इस बयान को चुनाव के दौरान बने राजनीतिक समीकरणों को लेकर उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अभिषेक झा ने अपने पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि उनके मन में किसी के प्रति कटुता या द्वेष नहीं है।

उनकी इस टिप्पणी ने चुनाव परिणाम के बाद एनडीए के भीतर संभावित राजनीतिक खींचतान को लेकर चर्चाओं को हवा दी है। हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति पर सीधे तौर पर आरोप लगाने के बजाय अपनी भावनाओं और अनुभवों को सामने रखा।

बंशीधर ब्रजवासी को जीत की बधाई

हार के बावजूद अभिषेक झा ने चुनाव में विजयी निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर ब्रजवासी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित प्रतिनिधि शिक्षकों की समस्याओं, स्नातकों के हितों और तिरहुत क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देंगे।

अभिषेक झा ने शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पहल किए जाने की उम्मीद भी जताई। उनके मुताबिक, क्षेत्र के विकास और समाज के हित में उठाए जाने वाले कदमों में वह सहयोग के लिए तैयार रहेंगे।

समर्थकों को दिया साथ निभाने का भरोसा

अभिषेक झा ने अपने पोस्ट में चुनाव के दौरान साथ देने वाले मतदाताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार का मतलब यह नहीं है कि लोगों के साथ उनका रिश्ता समाप्त हो गया।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह आगे भी अपने समर्थकों के साथ खड़े रहेंगे और क्षेत्र के लोगों से जुड़े मुद्दों पर अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान यदि उनकी किसी बात या व्यवहार से किसी को ठेस पहुंची हो, तो उन्होंने इसके लिए क्षमा भी मांगी।

तिरहुत स्नातक चुनाव के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजों के बाद अभिषेक झा के बयान ने चुनावी चर्चा को नया मोड़ दिया है। एक तरफ उन्होंने मतदाताओं का आभार जताया और विजयी प्रत्याशी को बधाई दी, वहीं दूसरी तरफ अमान्य मतों की संख्या को लेकर सवाल उठाए।

अब उनके 4700 वोट रद्द होने के दावे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर नजर रहेगी। साथ ही, एनडीए के भीतर चक्रव्यूह वाली उनकी टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल, तिरहुत स्नातक चुनाव में हार के बाद अभिषेक झा ने अपनी बात सार्वजनिक कर दी है। अब चुनाव से जुड़े उनके दावों और राजनीतिक संकेतों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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