बिहार MLC सदस्यता विवाद पहुंचा सभापति तक, बंशीधर बृजवासी और राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग

पटना। बिहार की राजनीति में विधान परिषद के दो सदस्यों की सदस्यता को लेकर विवाद सामने आया है। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए बंशीधर बृजवासी और डॉ. राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई गई है। इस मामले को लेकर जन सुराज के नेताओं ने बिहार विधान परिषद के सभापति से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

Nov 2, 2026 - 14:26
बिहार MLC सदस्यता विवाद पहुंचा सभापति तक, बंशीधर बृजवासी और राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग

पटना। बिहार की राजनीति में विधान परिषद के दो सदस्यों की सदस्यता को लेकर विवाद सामने आया है। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए बंशीधर बृजवासी और डॉ. राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई गई है। इस मामले को लेकर जन सुराज के नेताओं ने बिहार विधान परिषद के सभापति से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल ने सभापति के सामने दोनों विधान परिषद सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के मामले को उठाया। प्रतिनिधियों ने सवाल किया कि जब बंशीधर बृजवासी और डॉ. राहुल राज ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी, तो बाद में उन्होंने किसी राजनीतिक दल की सदस्यता कैसे ग्रहण कर ली?

दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग

जन सुराज की ओर से इस मामले में संवैधानिक प्रावधानों और दलबदल विरोधी कानून का हवाला दिया गया। पार्टी के नेताओं का कहना है कि दोनों सदस्यों के भाजपा में शामिल होने की परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने सभापति से पूरे मामले की संवैधानिक वैधता पर विचार करने और दोनों की विधान परिषद सदस्यता रद्द करने की मांग की है।

जन सुराज का तर्क है कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के मामले को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। इसी आधार पर पार्टी ने सभापति से उचित संवैधानिक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

सभापति के फैसले पर टिकी निगाहें

इस शिकायत के बाद बिहार विधान परिषद की राजनीति में सदस्यता को लेकर बहस शुरू हो गई है। अब इस मामले में सभापति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। शिकायत पर सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल जन सुराज ने अपनी मांग सभापति के सामने रख दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सभापति इस शिकायत पर क्या फैसला लेते हैं और दोनों विधान परिषद सदस्यों की सदस्यता को लेकर आगे क्या संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है।

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