जमुई में छेड़खानी कांड को लेकर विवाद, आरोपी को अस्पताल में VIP सुविधा देने का आरोप; अधिवक्ताओं ने किया कार्य बहिष्कार
जमुई में दो नाबालिग छात्र-छात्राओं से कथित दुर्व्यवहार के मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य आरोपी नंदन यादव को सदर अस्पताल के कैदी वार्ड की जगह कोरोना आइसोलेशन वार्ड में रखने और वहां एसी समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जमुई में दो नाबालिग छात्र-छात्राओं से कथित दुर्व्यवहार के मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य आरोपी नंदन यादव को सदर अस्पताल के कैदी वार्ड की जगह कोरोना आइसोलेशन वार्ड में रखने और वहां एसी समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आरोप है कि आरोपी की तबीयत को लेकर उसे अस्पताल में रखा गया, जबकि परिजनों और स्थानीय लोगों की ओर से उसकी स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी को निर्धारित समय के भीतर कोर्ट में पेश नहीं किया गया। यदि आरोपी अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में कोर्ट नहीं जा सकता, तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा अस्पताल जाकर रिमांड की कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है।
इसी मामले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार और अधिवक्ता रूपेश सिंह की गिरफ्तारी का भी विरोध किया जा रहा है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि उन्हें मामले को उठाने के कारण प्रताड़ित किया गया। पुलिस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
रूपेश सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में जिला विधिज्ञ संघ जमुई ने एक दिन के लिए न्यायालयी कार्य से अलग रहने और पेन डाउन हड़ताल का फैसला लिया है। संघ के अध्यक्ष सीताराम सिंह और महासचिव अमित कुमार की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया। अधिवक्ताओं ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और मुआवजे की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट के निरीक्षी न्यायमूर्ति तथा बिहार बार काउंसिल को भी पत्र भेजने की बात कही है।
मामले में पुलिस और प्रशासन पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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