थावे दुर्गा मंदिर चोरीकांड में पांच दोषियों को सजा, एसपी ने SIT और DIU टीम को किया सम्मानित

गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज स्थित प्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर चोरीकांड में अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस की जांच और अनुसंधान टीम की भूमिका की सराहना की गई है। मंदिर के गर्भगृह से मां भवानी का सोने का मुकुट, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान चोरी होने के मामले में पांच दोषियों को सजा सुनाई गई है। गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी ने मामले के उद्भेदन, अनुसंधान और अभियोजन में योगदान देने वाले पुलिसकर्मियों एवं संबंधित अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

Oct 16, 2026 - 18:30
थावे दुर्गा मंदिर चोरीकांड में पांच दोषियों को सजा, एसपी ने SIT और DIU टीम को किया सम्मानित

गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज स्थित प्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर चोरीकांड में अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस की जांच और अनुसंधान टीम की भूमिका की सराहना की गई है। मंदिर के गर्भगृह से मां भवानी का सोने का मुकुट, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान चोरी होने के मामले में पांच दोषियों को सजा सुनाई गई है। गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी ने मामले के उद्भेदन, अनुसंधान और अभियोजन में योगदान देने वाले पुलिसकर्मियों एवं संबंधित अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

45 दिनों तक CCTV फुटेज और मोबाइल नंबरों की जांच

एसपी विनय तिवारी के अनुसार, 17 दिसंबर 2025 की रात थावे दुर्गा मंदिर के गर्भगृह का ताला काटकर मां का सोने का मुकुट, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान चोरी कर लिए गए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया। तत्कालीन एसडीपीओ के नेतृत्व में एसआईटी और जिला सूचना इकाई (डीआईयू) की टीम ने जांच शुरू की।

पुलिस टीम ने करीब 45 दिनों तक मंदिर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही हजारों मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। लगातार जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 27 जनवरी को मामले का खुलासा किया। इस कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और चोरी गए सामान की बरामदगी की गई।

अनुसंधान और अभियोजन टीम की रही अहम भूमिका

इस मामले के अनुसंधान में कर्मवीर सिंह, डीआईयू टीम के सदस्य हरेंद्र और राजमुन्ना समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला अभियोजन पदाधिकारी विजय कुमार मिश्रा, एपीओ शुभम कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों ने भी योगदान दिया।

मंदिर के मुख्य पुजारी संजय पांडेय ने अदालत में बरामद आभूषणों की पहचान की। अनुसंधानकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।

आठ महीने तक चला स्पीडी ट्रायल, पांच दोषियों को सजा

एसपी विनय तिवारी ने बताया कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए करीब आठ महीने तक स्पीडी ट्रायल की प्रक्रिया में लगातार प्रयास किए गए। अदालत ने चार दोषियों को सात-सात साल की कैद और प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया। वहीं, एक अन्य दोषी को तीन साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

इस फैसले के बाद एसपी ने चोरीकांड के उद्भेदन से लेकर अनुसंधान और अभियोजन तक जुड़े अधिकारियों एवं कर्मियों के कार्यों की सराहना की।

पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार

एसपी विनय तिवारी ने कहा कि मामले में शामिल एसआईटी, डीआईयू और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ अभियोजन प्रक्रिया से जुड़े संबंधित लोगों को उनके योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र और नकद राशि देकर सम्मानित किया गया है।

थावे दुर्गा मंदिर चोरीकांड में तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और बरामद आभूषणों की पहचान ने जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अदालत के फैसले के बाद पुलिस विभाग ने मामले के उद्भेदन और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया में योगदान देने वाली टीम का उत्साहवर्धन किया।

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