रंगदारी और जानलेवा हमले के आरोप में बड़ा फैसला, पटना हाईकोर्ट ने दो आरोपियों की रिहाई बरकरार रखी
बक्सर के डुमरांव थाना क्षेत्र के चर्चित रंगदारी और जानलेवा हमले के मामले में पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सुरेश महतो और रमेश महतो को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले में ठोस साक्ष्यों की कमी और शिकायतकर्ता के बयानों में विरोधाभास को अहम आधार माना।
बक्सर के डुमरांव थाना क्षेत्र के चर्चित रंगदारी और जानलेवा हमले के मामले में पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सुरेश महतो और रमेश महतो को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले में ठोस साक्ष्यों की कमी और शिकायतकर्ता के बयानों में विरोधाभास को अहम आधार माना।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया। मामला डुमरांव थाना कांड संख्या 222/2018 से जुड़ा है।
5 लाख की रंगदारी मांगने का था आरोप
शिकायतकर्ता अखिलेश कुमार ने आरोप लगाया था कि 4 जून 2018 को चंदा गांव के पास सुरेश महतो ने उन्हें रोककर 5 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। आरोप के मुताबिक, उसी शाम भैंसाहा पुल के पास सुरेश और रमेश महतो अपने साथियों के साथ पहुंचे और उन्हें गाड़ी से बाहर खींच लिया।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने उनके गले में रस्सी डालकर जान से मारने की कोशिश की और उनकी जेब से 50 हजार रुपये भी छीन लिए। हालांकि, बाद में इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की कहानी और गवाहों के बयानों में कई अंतर सामने आए।
बयानों में विरोधाभास को कोर्ट ने माना अहम
कोर्ट के समक्ष शिकायतकर्ता के बयान और FIR में अंतर पाया गया। FIR में रस्सी से गला बांधकर घसीटने और जमीन पर पटकने की बात कही गई थी, जबकि गवाही के दौरान बयान में बदलाव सामने आया।
अदालत ने यह भी गौर किया कि आरोपियों के पास कथित तौर पर कट्टा होने के बावजूद रस्सी से गला दबाने की बात कही गई थी। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभियोजन की कहानी पर सवाल उठे।
चश्मदीद गवाहों और मेडिकल रिपोर्ट पर भी सवाल
मुकदमे के दौरान बताए गए कई स्वतंत्र चश्मदीद गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। वहीं, FIR में उल्लेखित एक अन्य गवाह गुलाब यादव को अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश नहीं किया गया।
मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टर ने गले पर मामूली खरोंच या निशान का उल्लेख किया था। कोर्ट के सामने यह भी आया कि दोनों पक्षों के बीच पहले से जमीन को लेकर विवाद और मुकदमेबाजी चल रही थी।
इन परिस्थितियों को देखते हुए निचली अदालत ने आरोपियों को बरी किया था। पटना हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के फैसले में ऐसी गंभीर कानूनी त्रुटि नहीं मिली, जिसके आधार पर अपीलीय अदालत को हस्तक्षेप करना पड़े। इसके बाद अपील को खारिज कर दिया गया।
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