पटना हाईकोर्ट ने तलाक की याचिका मंजूर की, पत्नी को मिलेंगे 71.66 लाख रुपये; मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द
पटना: पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए एक दंपती की तलाक याचिका मंजूर कर ली है। हाईकोर्ट ने लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद, लगातार अलगाव और रिश्ते में तनाव को मानसिक क्रूरता के दायरे में माना है। इसके साथ ही अदालत ने पत्नी के लिए 71.66 लाख रुपये की स्थायी भरण-पोषण राशि (परमानेंट अलिमनी) निर्धारित की है।
पटना:- पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए एक दंपती की तलाक याचिका मंजूर कर ली है। हाईकोर्ट ने लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद, लगातार अलगाव और रिश्ते में तनाव को मानसिक क्रूरता के दायरे में माना है। इसके साथ ही अदालत ने पत्नी के लिए 71.66 लाख रुपये की स्थायी भरण-पोषण राशि (परमानेंट अलिमनी) निर्धारित की है।
जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि लंबे समय तक पति-पत्नी के बीच तनाव और अलगाव बने रहने तथा वैवाहिक संबंधों के दोबारा स्थापित नहीं हो पाने की स्थिति मानसिक क्रूरता के दायरे में आ सकती है।
मामले के अनुसार, दोनों की शादी वर्ष 2009 में हुई थी। हालांकि, अप्रैल 2019 से दोनों अलग रह रहे थे। पति ने पत्नी पर व्यभिचार के आरोप भी लगाए थे, लेकिन अदालत ने ठोस साक्ष्य नहीं मिलने के कारण इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण निर्णयों, शोभा रानी बनाम मधुकर रेड्डी (1988) और समर घोष बनाम जया घोष (2007) का हवाला दिया। अदालत ने मानसिक क्रूरता से जुड़े कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए लंबे समय तक अलग रहने और वैवाहिक संबंधों के बहाल न हो पाने की परिस्थितियों पर विचार किया।
अदालत ने पति की आय और दोनों बच्चों के भरण-पोषण सहित परिवार की आर्थिक जरूरतों का आकलन करने के बाद पत्नी के लिए कुल 71,66,000 रुपये की स्थायी भरण-पोषण राशि तय की है। यह रकम दो समान किस्तों में देनी होगी। पहली किस्त 35,83,000 रुपये तीन महीने के भीतर और दूसरी किस्त 35,83,000 रुपये छह महीने के भीतर जमा करनी होगी।
अदालत के सामने पति की मासिक आय 3.70 लाख रुपये यानी सालाना 44.40 लाख रुपये का विवरण भी रखा गया था। इसी के आधार पर परिवार की आर्थिक जरूरतों और बच्चों के भरण-पोषण को ध्यान में रखते हुए स्थायी भरण-पोषण की राशि निर्धारित की गई।
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि पूरी राशि का भुगतान होने के बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ लंबित सभी मुकदमे वापस लें।
इस फैसले में हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में मानसिक क्रूरता, लंबे समय तक अलगाव और स्थायी भरण-पोषण तय करने से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर विचार किया है।
Tags:
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0







