पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: खनन नीलामी में देरी पर सरकार को लौटाने होंगे ₹2.90 करोड़, 12% ब्याज भी देना होगा

पटना: बिहार में खनन पट्टों की नीलामी और सरकारी स्तर पर होने वाली देरी को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने खनन टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सरकारी विभागों की लेटलतीफी पर रोक लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

Oct 2, 2026 - 14:59
पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: खनन नीलामी में देरी पर सरकार को लौटाने होंगे ₹2.90 करोड़, 12% ब्याज भी देना होगा

पटना: बिहार में खनन पट्टों की नीलामी और सरकारी स्तर पर होने वाली देरी को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने खनन टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सरकारी विभागों की लेटलतीफी पर रोक लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मामला शेखपुरा जिले के स्टोन ब्लॉक नंबर-27 की नीलामी से जुड़ा है। वर्ष 2017 में हुई नीलामी में मेसर्स बालाजी एंटरप्राइज सबसे बड़ी बोलीदाता बनी थी। हालांकि, जिला प्रशासन और खान विभाग की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में ब्लॉक के सही जियो-कोऑर्डिनेट्स उपलब्ध नहीं होने के कारण कंपनी को एनवायरमेंट क्लीयरेंस हासिल करने में देरी हुई।

इसके बाद शेखपुरा के डीएम ने देरी की जिम्मेदारी ठेकेदार पर डालते हुए लेटर ऑफ इंटेंट रद्द कर दिया और करीब ₹2.90 करोड़ की जमानत राशि जब्त कर ली।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान माना कि देरी के लिए केवल सफल बोलीदाता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकारी स्तर पर जरूरी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने में हुई देरी को भी कोर्ट ने गंभीरता से लिया।

कोर्ट ने सरकार को ₹2.90 करोड़ की जब्त राशि वापस करने का आदेश दिया है। साथ ही इस राशि पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नए टेंडर से पहले संबंधित राशि का भुगतान करना होगा और संबंधित कंपनी को नए टेंडर में भाग लेने से रोका नहीं जा सकता।

खनन टेंडर को लेकर हाईकोर्ट के अहम निर्देश

कोर्ट ने खनन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए कई समय-सीमाएं तय की हैं। इनमें टेंडर नोटिस जारी होने के साथ ही जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करना और प्रत्येक खनन ब्लॉक के सटीक जियो-कोऑर्डिनेट्स उपलब्ध कराना शामिल है।

नीलामी पूरी होने के 15 दिनों के भीतर लेटर ऑफ इंटेंट जारी करने, इसके बाद सफल बोलीदाता को 15 दिनों के भीतर माइनिंग प्लान उपलब्ध कराने और विभाग को अगले 15 दिनों में उस पर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।

माइनिंग प्लान की मंजूरी के बाद 7 दिनों के भीतर SEIAA में आवेदन करने की समय-सीमा भी तय की गई है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में सरकारी विभागों की ओर से देरी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की मानी जाएगी और परिस्थितियों के अनुसार सरकार को नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है।

कोर्ट के इस फैसले से बिहार में खनन पट्टों की नीलामी प्रक्रिया में सरकारी स्तर पर जवाबदेही, समयबद्धता और पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव की उम्मीद है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0