गोपालगंज में कचरे का बदला रूप, गीले कचरे से तैयार हो रही ‘गोपाली खाद’; जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा

गोपालगंज: जिले में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की दिशा में एक उपयोगी पहल सामने आई है। घरों से निकलने वाले गीले कचरे को अब बेकार समझकर फेंका नहीं जा रहा, बल्कि उससे जैविक खाद तैयार की जा रही है। पंचायत स्तर पर तैयार इस खाद को ‘गोपाली खाद’ नाम दिया गया है, जिसे किसानों को बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

Oct 6, 2026 - 16:13
Oct 6, 2026 - 16:13
गोपालगंज में कचरे का बदला रूप, गीले कचरे से तैयार हो रही ‘गोपाली खाद’; जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा

गोपालगंज: जिले में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की दिशा में एक उपयोगी पहल सामने आई है। घरों से निकलने वाले गीले कचरे को अब बेकार समझकर फेंका नहीं जा रहा, बल्कि उससे जैविक खाद तैयार की जा रही है। पंचायत स्तर पर तैयार इस खाद को ‘गोपाली खाद’ नाम दिया गया है, जिसे किसानों को बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

सासामुसा, कुचायकोट के स्वच्छता पर्यवेक्षक मुन्ना कुमार यादव के अनुसार, पंचायत के प्रत्येक वार्ड में कर्मी घर-घर जाकर कचरे का संग्रहण करते हैं। इसके बाद कचरे को अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (WPU) तक पहुंचाया जाता है, जहां गीले और सूखे कचरे को अलग किया जाता है। गीले कचरे से कंपोस्ट खाद तैयार होती है, जबकि सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए बाहर भेज दिया जाता है।

तैयार ‘गोपाली खाद’ को बाजार में 10 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाता है। खाद की बिक्री से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल स्वच्छता कर्मियों के पेडल रिक्शा और ठेला रिक्शा की मरम्मत में भी किया जाता है, जिससे घर-घर कचरा संग्रहण का काम सुचारू रूप से जारी रह सके।

12 वार्डों से हो रहा कचरे का संग्रहण

पंचायत में कुल 12 वार्ड हैं और सभी वार्डों से गीले और सूखे कचरे का नियमित उठाव किया जाता है। पंचायत में बनाए गए WPU सेंटर में कचरे के पृथक्करण के बाद जैविक खाद तैयार की जाती है।

एक स्वच्छता कर्मी ने बताया कि वह खुद ‘गोपाली खाद’ का इस्तेमाल जैविक खेती में कर रहे हैं। इस खाद की मदद से बैंगन, टमाटर और मिर्च की खेती की जा रही है और फसल भी अच्छी होने की बात बताई गई है। पंचायत के लोग भी जैविक खेती को देखने पहुंच रहे हैं और तैयार खाद की बिक्री भी हो रही है।

स्वच्छता शुल्क से व्यवस्था को मजबूती

पंचायत में घर-घर से स्वच्छता शुल्क भी लिया जाता है। समय पर शुल्क मिलने से कचरा संग्रहण और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल रही है।

हर वर्ष 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत दिवस मनाया जाता है। इसी अवसर पर गोपालगंज में ‘हमारे सफाई कर्मी, हमारे सुपरहीरो’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सफाई कर्मियों और स्वच्छता पर्यवेक्षकों ने स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

गोपालगंज की यह पहल दिखाती है कि उचित प्रबंधन के जरिए कचरे को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। गीले कचरे से तैयार जैविक खाद जहां किसानों को खेती के लिए विकल्प दे रही है, वहीं इसकी बिक्री और स्वच्छता शुल्क से मिलने वाली राशि ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रही है।

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