राष्ट्रकवि दिनकर को समर्पित रही शब्दवीणा की साहित्यिक संध्या

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती के अवसर पर एक भावपूर्ण "साहित्यिक संध्या" का आयोजन किया गया।

Sep 27, 2026 - 16:27
राष्ट्रकवि दिनकर को समर्पित रही शब्दवीणा की साहित्यिक संध्या

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की झारखंड प्रदेश समिति एवं देवघर जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती के अवसर पर एक भावपूर्ण "साहित्यिक संध्या" का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार वरुण राय, शब्दवीणा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष व देवघर जिला संरक्षक वरिष्ठ साहित्यसेवी डॉ विजय शंकर, झारखंड प्रदेश प्रवक्ता वरिष्ठ कवि अनिल कुमार झा, शब्दवीणा के देवघर जिला सचिव व झारखंड प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. परशुराम तिवारी, युवा कवि व ग़ज़लकार सागर मिश्रा, पुनीत कुमार दुबे, पुरुषोत्तम दास, उमाशंकर राव उरेन्दू सहित अनेक साहित्यप्रेमियों ने अपनी रचनाओं से आयोजन की गरिमा को बढ़ाया। रिमझिम बारिश की बूंदों के बीच आयोजित यह कार्यक्रम देवभूमि देवघर सहित देश भर के साहित्यप्रेमियों के लिए विचार, कविता और संवेदना का यादगार संगम बन गया। कार्यक्रम में राष्ट्रकवि दिनकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने दिनकर को केवल ओज और राष्ट्रचेतना का कवि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना, और स्वाभिमान का सशक्त रचनाकार बतलाया। साहित्यसेवियों ने कहा कि दिनकर की रचनाएँ संघर्ष, साहस, न्याय और राष्ट्रप्रेम जैसे भावों से ओतप्रोत दिखती हैं। उनकी कविताओं में स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना के साथ-साथ स्वतंत्र भारत के निर्माण की आकांक्षा भी दिखाई देती है। 'रश्मिरथी' में कर्ण के माध्यम से दिनकर जी ने सामाजिक विषमता, मानवीय गरिमा, और जीवन के संघर्ष जैसे विषयों को प्रभावशाली स्वर दिया, जबकि 'कुरुक्षेत्र' में युद्ध और शांति के प्रश्नों पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि महान साहित्यकारों की जयंती तभी सार्थक है, जब उनकी रचनाओं को केवल स्मरण न किया जाए, बल्कि उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। दिनकर की साहित्यिक विरासत आज भी हमें यह प्रेरणा देती है कि शब्द केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में चेतना जगाने की शक्ति भी हैं। शब्दवीणा की इस साहित्यिक संध्या ने इस सत्य को प्रमाणित कर दिया कि साहित्य के प्रति समर्पण की भावना विपरीत परिस्थितियों की मोहताज़ नहीं होती। बाहर हो रही अनवरत बारिश के बीच राष्ट्रकवि दिनकर को समर्पित यह शाम साहित्यिक वर्षा, वैचारिक पुष्पांजलि, और राष्ट्रकवि के प्रति सामूहिक श्रद्धा का अविस्मरणीय अवसर बन गयी। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर शब्दवीणा की संस्थापिका एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी, राष्ट्रीय परामर्शदाता एवं झारखंड प्रदेश संरक्षक प्रो. रामनंदन सिंह, राष्ट्रीय सचिव महावीर सिंह वीर, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेश विद्यार्थी एवं पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष राम नाथ बेख़बर एवं सचिव राम पुकार सिंह ने शब्दवीणा झारखंड प्रदेश समिति के लिए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। राष्ट्रकवि दिनकर को नमन करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा हुई। बच्चों और मातृशक्ति की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

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