44वीं वाहिनी एसएसबी नरकटियागंज में पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को दी गई श्रद्धांजलि
कमांडेंट बलवंत सिंह नेगी के नेतृत्व में अधिकारियों एवं जवानों ने पुष्प अर्पित कर शहीदों के बलिदान को किया नमन
नरकटियागंज। 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), नरकटियागंज के प्रांगण में बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर शहीद जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कमांडेंट श्री बलवंत सिंह नेगी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में वाहिनी के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों एवं सभी बलकार्मिकों ने शहीदों की स्मृति में मौन धारण कर उन्हें नमन किया। इस दौरान कमांडेंट ने पिछले एक वर्ष में शहीद हुए पुलिस बलों एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के नाम पढ़कर सुनाए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमांडेंट बलवंत सिंह नेगी ने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन उन वीर पुलिसकर्मियों एवं केंद्रीय सशस्त्र बलों के जवानों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को याद करने के लिए समर्पित है, जिन्होंने देश की सुरक्षा एवं सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने पुलिस स्मृति दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में हुई घटना से जुड़ी है। उस दिन चीनी सैनिकों के घात लगाकर किए गए हमले में पुलिस दल के 10 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना ने देश की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के बलिदान और समर्पण की गौरवगाथा को इतिहास में दर्ज किया। घटना के लगभग तीन सप्ताह बाद 13 नवंबर 1959 को शहीद जवानों के पार्थिव शरीर लौटाए गए। इसके बाद जनवरी 1960 में आयोजित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस वर्ष पुलिस स्मृति दिवस की 67वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। कार्यक्रम के दौरान उप कमांडेंट श्री ज्ञानेंद्र कुमार, उप कमांडेंट मो. हसनैन खान, सहायक कमांडेंट एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुंदन जायसवाल, सहायक कमांडेंट (संचार) श्री रियाज पी. सहित 44वीं वाहिनी के अन्य अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी एवं सभी बलकार्मिक उपस्थित रहे। सभी ने शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।
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