पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित शख्सियत हैं तुषार कांति शीट, जिनके सिर चढ़कर बोलता है समाज सेवा का जुनून

पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित शख्सियत हैं तुषार कांति शीट, जिनके सिर चढ़कर बोलता है समाज सेवा का जुनून

विनीत कुमार की रिपोर्ट

रांची। कुछ लोग समाजसेवा को ही अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बना लेते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा को अपनी दिनचर्या में शुमार कर उनके प्रति नि:स्वार्थ भाव से सेवारत रहते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं राजधानी के निवारणपुर स्थित अम्रपाली अपार्टमेंट निवासी तुषार कांति शीट। श्री शीट एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह पर्यावरणविद व शिक्षाविद भी हैं। शहर की लोकप्रिय सामाजिक-धार्मिक स्वयंसेवी संस्था श्रीरामकृष्ण सेवा संघ के सहायक सचिव के पद पर सेवारत हैं। इस संस्था के माध्यम से विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है।
सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने वाले श्री शीट ने समाज सेवा के क्षेत्र में राजधानी में अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर ली है। समाजसेवा का जुनून उनके सिर चढ़कर बोलता है। श्री शीट वैसे तो पीड़ित मानवता की सेवा में सदैव समर्पित रहते हैं, लेकिन खासतौर पर विगत तकरीबन डेढ़ वर्षो से कोरोना संक्रमण काल के दौरान उन्होंने मानव सेवा की जो अद्भुत मिसाल पेश की है, वह अनुकरणीय ही नहीं, बल्कि प्रेरणास्रोत भी बन गई है। श्री शीट ने वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दौरान गरीबों और जरूरतमंदों को, खासकर स्लम एरिया के लोगों को भोजन की परेशानियों को देखते हुए उनके बीच जाकर निरंतर उन्हें खाद्य सामग्री मुहैया कराया। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लोगों को हो रही अस्पतालों में बेड की कमी, ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी, दवाओं का अभाव को दूर करने की हरसंभव कोशिश की। कोरोना से मृत लोगों के अंतिम संस्कार के लिए भी आवश्यक सामग्री जुटाने में वह सहयोग करते रहे।
मानव सेवा के प्रति उनके उल्लेखनीय और उत्कृष्ट योगदान के लिए देश की नामी-गिरामी दर्जनाधिक संस्थाओं द्वारा उन्हें कोरोना योद्धा के सम्मान से सम्मानित किया गया है। हाल ही में उन्हें द ग्लोबल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय समाज सेवा रत्न -2021 के पुरस्कार से भी नवाजा गया। श्री शीट यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले झारखंड के संभवत पहले समाजसेवी हैं। लॉकडाउन के दौरा उन्होंने मानव सेवा की मिसाल तो पेश की ही, इसके अलावा उन्होंने सड़कों पर लावारिस विचरण करते बेजुबान जानवरों के लिए भी निवाले की व्यवस्था कर पशु प्रेमी होने का परिचय दिया।
समाजसेवा को ही उन्होंने अपना ओढ़ना-बिछौना बना लिया है। वह कहते हैं कि पीड़ित व्यक्तियों की सेवा करने से उन्हें सुखद अनुभूति होती है। इससे मानव जीवन की सार्थकता भी साबित होती है। उनका मानना है कि अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए सामाजिक कार्यों के प्रति भी समय निकालकर लोगों को सहभागिता निभानी चाहिए। विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने से ईश्वर भी खुश होते हैं। अंत में तुषार कांति यह गाना गुनगुनाते हुए अपनी बात समाप्त करते हैं “गरीबों की सुनो, वो तुम्हारी सुनेगा, तुम एक पैसा दोगे, वो दस लाख देगा”।