बिंदल मॉल फायरिंग पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- पुलिस नेतृत्व में मेरिट नहीं तो सड़क पर कानून नहीं, डर का राज दिखेगा

रांची/जमशेदपुर:- जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी की घटना को लेकर झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। शनिवार को हुई इस घटना में चार लोग घायल हुए थे। पुलिस के अनुसार घटना में 11 राउंड फायरिंग की बात सामने आई है और मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।

Sep 27, 2026 - 21:27
बिंदल मॉल फायरिंग पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- पुलिस नेतृत्व में मेरिट नहीं तो सड़क पर कानून नहीं, डर का राज दिखेगा

रांची/जमशेदपुर:- जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी की घटना को लेकर झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। शनिवार को हुई इस घटना में चार लोग घायल हुए थे। पुलिस के अनुसार घटना में 11 राउंड फायरिंग की बात सामने आई है और मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।

बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि जमशेदपुर की घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार, पहले जिस तरह की आपराधिक घटनाओं की चर्चा धनबाद को लेकर होती थी, उसी तरह की घटनाएं अब राज्य के दूसरे शहरों में भी सामने आ रही हैं।

उन्होंने पुलिस के शीर्ष पद पर नियुक्तियों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। मरांडी ने आरोप लगाया कि पुलिस नेतृत्व में योग्यता और सेवा रिकॉर्ड के बजाय सत्ता के प्रति नजदीकी तथा राजनीतिक वफादारी को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब पुलिस नेतृत्व का आधार मेरिट के बजाय कथित 'सेटिंग' होगी, तो कानून-व्यवस्था पर इसका असर दिखाई देगा।

झारखंड पुलिस की आधिकारिक 2026 सिविल लिस्ट में तदाशा मिश्रा को डीजीपी के पद पर दर्ज किया गया है। वहीं, सितंबर 2026 में ऑल इंडिया रेडियो की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने तदाशा मिश्रा की डीजीपी नियुक्ति को छह महीने की शेष सेवा से जुड़े अपने पूर्व निर्देशों के संदर्भ में नियमों के विपरीत बताया था।

अतिरिक्त प्रभार और अधिकारियों की पोस्टिंग पर सवाल

मरांडी ने कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने और कुछ पदों के खाली रहने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने एडीजी स्तर के अधिकारी मनोज कौशिक के पास अतिरिक्त जिम्मेदारियों, मयूर पटेल को दुमका आईजी का प्रभार दिए जाने तथा अन्य अधिकारियों के बीच अतिरिक्त प्रभार के बंटवारे का प्रशासनिक आधार सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने कुछ अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान कोयला तस्करी और अवैध कमाई से जुड़े कथित आरोपों का भी उल्लेख किया और सरकार से पूछा कि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई गई। हालांकि, ये आरोप मरांडी द्वारा लगाए गए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

CID में अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने सीआईडी में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों के अनुभव और क्षमता के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने JPSC-JSSC सहित बड़ी जांचों में अधिकारियों की नियुक्ति और कार्य-विभाजन को सार्वजनिक करने की मांग की।

मरांडी ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद कुछ अधिकारियों के लंबे समय तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहने और जांच एजेंसियों में अनुभवी अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

सरकार से कार्रवाई और जवाबदेही की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा कि केवल किसी घटना के बाद अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अपराधियों की गिरफ्तारी, उन्हें कथित संरक्षण देने वालों की भूमिका की जांच और पुलिस पदस्थापन में योग्यता, ईमानदारी तथा जवाबदेही को प्राथमिकता देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी जनता की सुरक्षा है और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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