बांकीपुर चुनाव से पहले तेजस्वी और प्रशांत किशोर को बड़ा झटका, बीजेपी में शामिल हुए कई दिग्गज नेता
PATNA : बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले बीजेपी ने विपक्ष को एक और बड़ा राजनीतिक झटका दिया है. दरअसल बांकीपुर उपचुनाव से पहले तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर को फिर से बड़ा झटका लगा है. सोमवार को पटना स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व सांसद अर्जुन राय समेत कई प्रमुख नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली. वहीं, बांकीपुर उपचुनाव में उम्मीदवार रहे सिकंदर कुशवाहा ने भी नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी का दामन थाम लिया.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सभी नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई. इस मौके पर उन्होंने कहा कि पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का भाजपा परिवार में स्वागत है. उन्होंने विश्वास जताया कि इन नेताओं के जुड़ने से पार्टी का संगठन और अधिक मजबूत होगा तथा आगामी चुनावों में बीजेपी को इसका लाभ मिलेगा. मिलन समारोह में अर्जुन राय के अलावा विमल शुक्ला, साकेत कुमार, मोनी गुप्ता, अधिवक्ता मनोज गुप्ता, पटना नगर निगम की पूर्व प्रत्याशी कुसुम लता वर्मा ने भी बीजेपी की सदस्यता ली.
प्रशांत किशोर को भी झटका, इनकी भी खूब चर्चा
सबसे ज्यादा चर्चा बांकीपुर उपचुनाव से जुड़े सिकंदर कुशवाहा के बीजेपी में शामिल होने की रही. उन्होंने नामांकन वापस लेकर बीजेपी का साथ देने का फैसला किया. इसे बांकीपुर सीट पर बीजेपी की चुनावी रणनीति को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है.
वहीं बिहार के जाने-माने अधिवक्ता वाईवी गिरी के पुत्र और जन सुराज से जुड़े नेता आशीष गिरी भी बीजेपी में शामिल हो गए. पटना स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. आशीष गिरी का बीजेपी में शामिल होना जन सुराज के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है.
महागठबंधन और जनसुराज दोनों के लिए चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के नेताओं का बीजेपी में शामिल होना महागठबंधन और जन सुराज, दोनों के लिए चुनौती बढ़ा सकता है. बीजेपी ने इस सदस्यता अभियान को संगठन विस्तार का हिस्सा बताया है, जबकि विपक्ष की ओर से अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में चुनावी माहौल के बीच यह राजनीतिक बदलाव आने वाले दिनों में बिहार की सियासत को और गर्मा सकता है.
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