बेड़ो में करम पूर्व संध्या समारोह, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने युवाओं से संस्कृति और परंपरा बचाने का किया आह्वान
बेड़ो: रांची जिले के बेड़ो प्रखंड के कटरमाली में 10 पड़हा के तत्वावधान में करम पूर्व संध्या समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समारोह में पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष सूरज मंडल और विश्व आदिवासी सुंदरी पूजा लकड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
बेड़ो: रांची जिले के बेड़ो प्रखंड के कटरमाली में 10 पड़हा के तत्वावधान में करम पूर्व संध्या समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समारोह में पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष सूरज मंडल और विश्व आदिवासी सुंदरी पूजा लकड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
कार्यक्रम में राज्यपाल का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। 10 पड़हा के अध्यक्ष सुबोध लकड़ा ने राज्यपाल को आदिवासी पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने समस्त झारखंडवासियों को प्रकृति पर्व करमा पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करम पर्व जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के साथ गहरे संबंध का प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और भाई-बहन के प्रेम की भावना को भी दर्शाता है।
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड की भाषाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, लोककलाएं और पारंपरिक ज्ञान हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और भाषा एवं परंपराओं के संरक्षण व संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
पूर्व सांसद सूरज मंडल ने करम पर्व की लोककथा का उल्लेख करते हुए कहा कि करम पर्व प्रकृति से जुड़ा पर्व है। उन्होंने करमा और धर्मा दो भाइयों की कथा का जिक्र करते हुए बताया कि सूखे के समय करम डाली की पूजा करने के बाद बारिश हुई और अच्छी फसल हुई। इसी मान्यता के कारण करम पर्व का प्रकृति और कृषि से गहरा संबंध माना जाता है।
वहीं विश्व आदिवासी सुंदरी पूजा लकड़ा ने कहा कि वह इसी जरिया गांव की बेटी हैं और अपने गांव में आयोजित करम पूर्व संध्या कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए गर्व की बात है।
कार्यक्रम के अंत में 10 पड़हा अध्यक्ष सुबोध लकड़ा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि झारखंड के लोग जल, जंगल, जमीन और प्रकृति से गहराई से जुड़े हैं। करम पर्व भी प्रकृति और भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व है।
करम पूर्व संध्या समारोह में क्षेत्र के 16 खोड़हा नृत्य दलों ने हिस्सा लिया और पारंपरिक नृत्य-संगीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में 10 पड़हा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने महत्वपूर्ण सहयोग किया।
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